अमरावती: आंध्र प्रदेश के मंत्रिमंडल ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य विधान परिषद को खत्‍म करने की प्रक्रिया को हरी झंडी दिखा दी. विधान परिषद को समाप्त करने का मसौदा अब विधानसभा में पेश कर दिया गया है, जहां इस पर चर्चा जारी है. बता दें कि सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के पास निम्‍न सदन विधानसभा में बहुमत है और इसलिए यह विधेयक आसानी से मंजूर हो सकता है. विधानसभा से मंजूरी मिलते ही इस बिल को राज्यपाल के पास उनकी स्‍वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा.

दरअसल, वाईएस जगनमोहन रेड्डी की सरकार पिछले हफ्ते राज्य विधानसभा के उच्च सदन में राज्य में तीन राजधानियों से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करवाने में विफल रही थी. इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल ने यह कदम उठाया है. विधानसभा और राज्‍यपाल की मंजूरी के पास बिल को लोकसभा और राज्यसभा में मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा. भारत के राष्ट्रपति को भेजे जाने से पहले विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा मंजूरी देनी होगी.

जगन सरकार द्वारा राज्य विधानमंडल के दो महत्वपूर्ण विधानों को पारित करने में विफल होने के लगभग एक सप्ताह बाद यह प्रस्‍ताव आया है. बता दें कि दो विधेयक आंध प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020 और उच्‍च सदन में राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (सीआरडीए) अधिनियम (निरसन) विधान परिषद में पास नहीं हो सके थे.

आंध्र की 58 सदस्यीय परिषद में वाईएसआर कांग्रेस 9 सदस्यों के साथ अल्पमत में है. इसमें विपक्षी तेलगु देशम पार्टी के 28 सदस्य हैं. सत्तारुढ़ दल सदन में वर्ष 2021 में ही बहुमत प्राप्त कर पाएगा, जब विपक्षी सदस्यों का छह साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा.

मुख्यमंत्री ने उच्च सदन की आवश्यकता पर एक प्रश्न उठाया था. उन्‍होंने कहा था, ”हमें गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि क्या हमें ऐसा सदन चाहिए, जो केवल राजनीतिक उद्देश्यों के साथ कार्य करता प्रतीत हो. परिषद का होना अनिवार्य नहीं है, जो हमारी अपनी रचना है, और यह केवल हमारी सुविधा के लिए है. इसलिए हम सोमवार को इस मुद्दे पर आगे चर्चा करेंगे और परिषद को जारी रखने या न रखने के बारे में निर्णय लेंगे.