अमरावती: आंध्र प्रदेश में गरीब और निम्न मध्य वर्ग के लोगों को पांच रुपये में भरपेट खाना खिलाने वाली अन्ना कैंटीनें गुरुवार से बंद कर दी गईं. कैंटीन में प्रतिदिन जाने वाले दिहाड़ी मजदूर, भिखारी और दूसरे गरीब लोग जब वहां पहुंचे तो कैंटीन बंद मिलीं. राज्य सरकार के आदेशों का पालन करते हुए आउटसोसिर्ंग एजेंसी ने भोजन की सप्लाई रोक दी और सभी 204 कैंटीन ने अपने शटर गिरा दिए.

हालांकि, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार ने यह आश्वसन दिया है कि इन सभी कैंटीन को कुछ समय के लिए बंद किया गया है और सरकार इसमें जरूरी बदलाव करके इसे पुन: सुचारू रूप से चलाएगी. पिछले साल जुलाई-अगस्त से चल रही यह कैंटीन गरीब लोगों के लिए वरदान साबित हो रही थी, क्योंकि यहां प्रत्येक बार सिर्फ पांच रुपये देने पर नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात्रि का भोजन गरीबों को आसानी से मिल जाया करता था. पूर्ववर्ती तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) की सरकार ने इस योजना का आरंभ किया था. योजना के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरने के बाद नई सरकार ने कैंटीन को सुव्यवस्थित करने का निर्णय लिया है.

कैंटीनों के लिए खाना बानाने और उसे बांटने का काम करने वाली अक्षय पात्रा ने आखिरी बार बुधवार रात को भोजन की सप्लाई की थी. सरकार ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है, जिसके बाद से कैंटीनों को बंद कर दिया गया है. टीडीपी के महासचिव नारा लोकेश ने कैंटीनों को बंद किए जाने के बाद ट्विटर के सहारे जगन मोहन रेड्डी की सरकार पर निशाना साधा. टीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के बेटे लोकेश ने कहा कि सरकार ने राजनीति से प्ररित होकर बदले की भावना के चलते कैंटीन को बंद किया है.

उन्होंने पूछा कि श्रीमान मुख्यमंत्री, भूख राजनीति नहीं जानती है. आपके राजनीति से प्ररित बदले की भावना के लिए क्या गरीबों को भूखा रहना होगा. नए नाम और रंग के साथ इन्हें फिर से शुरू करने में शासन-प्रशासन को कितान वक्त लगेगा, इसकी जानकारी नहीं है. वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान फायदा लेने के लिए योजना का उपयोग टीडीपी ने किया. उन्होंने कहा कि अपनी पार्टी के रंग से मिलता पीला रंग उन्होंने कैंटीनों पर भी किया, ताकि चुनाव में उन्हें इसका फायदा मिल सके.