नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में 23 मार्च से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे अन्ना हजारे का अनशन मंगलवार शाम को खत्म हो सकता है. केंद्र सरकार की तरफ से दूत बनकर आए महराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने अन्ना हजारे से मिलने के बाद उम्मीद जताई है कि अन्ना मंगलवार को अपना अनशन खत्म कर सकते हैं. मंत्री गिरिश महाजन ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को भरोसा दिलाया है कि उनकी ज्यादातर मांगों पर ध्यान दिया जाएगा. महाजन ने हजारे से मिलने के बाद कहा, ‘‘मंगलवार को हम अन्नाजी को एक लिखित प्रस्ताव देंगे और हमें उम्मीद है कि वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन मंगलवार को खत्म करेंगे.’’Also Read - देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में अन्ना हजारे का ऐलान- ... कृषि कानूनों के खिलाफ अनशन नहीं करेंगे

मंत्री केंद्र और राज्य सरकार, दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. हालांकि, इस मुलाकात के बारे में अन्ना हजारे के खेमे की ओर से कुछ नहीं कहा गया है. महाजन, महाराष्ट्र में जल संसाधन एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हैं. उन्होंने कहा कि हजारे की 11 मुख्य मांगों में करीब सात- आठ पर सहमति बनी है. इनमें लोकपाल की नियुक्ति और किसानों की उपज को बेहतर मूल्य प्रदान करना भी शामिल है. महाजन ने कहा, ‘‘उनकी ज्यादातर मांगों पर ध्यान दिया जाएगा.’’ Also Read - Kisan Andolan: अन्ना हजारे का ऐलान- केंद्र सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल करूंगा, किसानों से खोखले वादे किए गए

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य देने पर ध्यान दिया गया है. मंत्री ने दावा किया कि लोकपाल के मामले में दो बैठकें हुई हैं और इस मुद्दे का हल तीसरी बैठक में होने की संभावना है. हजारे लोकपाल की नियुक्ति सहित अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए 23 मार्च से भूख हड़ताल पर हैं. उनका वजन चार किलो तक घट गया है लेकिन अन्ना ने कहा है कि वो अभी पूरी तरह से ठीक हैं और अगले 10 दिन तक अपना अनशन जारी रख सकते हैं. Also Read - किसानों को बहकाया गया, अन्ना हजारे समर्थन के लिए आंदोलन में नहीं आएंगे: नितिन गडकरी

अन्ना हजारे केन्द्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 23 मार्च से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं. उनके 2011 के आंदोलन के कारण लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 पारित हुआ था लेकिन केंद्र ने अब तक लोकपाल की नियुक्त नहीं की है. इस बार हजारे सरकार से किसानों के लिए बेहतर न्यूनतम समर्थन दामों की भी मांग कर रहे हैं.