भारत का झंडा लगे एक और जहाज ने पार किया होर्मुज, जानिए टैंकर 'ग्रीन आशा' कितना LPG लेकर आ रहा है

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:April 5, 2026 2:47 PM IST

जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत का झंडा लगा टैंकर 'ग्रीन आशा' भारतीय समय के अनुसार दोपहर 12:30 बजे तक ईरान के लारक, केशम और होर्मुज द्वीपों के बीच ईरानी जलक्षेत्र से गुजर रहा था.

India-flagged vessel passed Strait of Hormuz: लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत आ रहे एक और जहाज ने सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है. होर्मुज से गुज़रने वाला यह नौवां भारतीय टैंकर है. जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत का झंडा लगा टैंकर 'ग्रीन आशा' भारतीय समय के अनुसार दोपहर 12:30 बजे तक ईरान के लारक, केशम और होर्मुज द्वीपों के बीच ईरानी जलक्षेत्र से गुजर रहा था.

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टैंकर 'ग्रीन आशा' से पहले शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस, जग वसंत, BW Tyr, BW Elm और ग्रीन सांवरी नाम के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलकर भारत पहुंच चुके हैं. बता दें कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज में युद्ध के कारण सुरक्षा चिंताएं खड़ी हो गई हैं.

कितनी गैस आ रही है भारत?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की अनुसार, 'ग्रीन आशा' में लगभग 20,000 टन LPG होने का अनुमान है. शिपिंग डेटाबेस के अनुसार, 'ग्रीन आशा' MOL इंडिया के स्वामित्व वाला एक मध्यम आकार का गैस कैरियर है. MOL इंडिया, जापान स्थित वैश्विक शिपिंग दिग्गज कंपनी 'Mitsui OSK Lines' की भारतीय शाखा है. इस टैंकर की डेडवेट क्षमता 26,000 टन से अधिक है. बता दें कि डेडवेट टन भार वह कुल वजन होता है जिसे कोई जहा ढो सकता है.

हालांकि टैंकर 'ग्रीन आशा' पिछले जहाजों के मुकाबले कम एलपीजी लेकर भारत आ रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में होर्मुज को पार करने वाले अन्य भारतीय LPG टैंकर बड़े गैस कैरियर थे. इनकी LPG ढोने की क्षमता 'ग्रीन आशा' से दोगुने से ज्यादा थी.

द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र से 'ग्रीन आशा' के रवाना होने के बाद फारस की खाड़ी में भारत का झंडा लगे 16 जहाज मौजूद होंगे. इनमें से एक 'जग विक्रम' भी जल्द ही संकरा समुद्री रास्ता पार करने वाला है.

क्यों होर्मुज से नहीं निकल पा रहे टैंकर

ईरान ने अमेरिका, इजरायल से युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. दुनिया के एनर्जी सेक्टर के लिए यह रास्ता काफी अहम है, क्योंकि विश्व में होने वाले पेट्रोलियम के कुल व्यापार में से 20 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर जाता है. इस तनाव ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया के ऊर्जा बाजार कठिन चुनौती से गुजर रहे हैं. समुद्री आंकड़ों से पता चलता है कि इस मार्ग का उपयोग करने वाले लगभग 60 प्रतिशत मालवाहक जहाज या तो ईरान से आ रहे हैं या ईरान के लिए ही जा रहे हैं.

बता दें कि टैंकर 'ग्रीन आशा' से पहले मार्च के अंत में, पाइन गैस और जग वसंत सहित चार भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों ने तीन दिनों की अवधि में 92,600 टन से अधिक एलपीजी के साथ होर्मुज पार किया था. इससे पहले, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने मार्च के मध्य में गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों तक लगभग 92,700 टन एलपीजी पहुंचाई थी.

भारत में कैसी है स्थिति

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत ने हाल ही में ईरान से एलपीजी की एक खेप आयात की है, जो मंगलुरु के पश्चिमी बंदरगाह पर पहुंच गई है और उसे उतारा जा रहा है. अधिकारियों ने कहा कि घरेलू ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है. सरकार ने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कुछ अहम कदम भी उठाए हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि 5 किलोग्राम के एफटीएल सिलेंडर नजदीकी एलपीजी वितरकों पर उपलब्ध हैं और इन्हें किसी भी वैध पहचान पत्र दिखाकर खरीदा जा सकता है. पते के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है. 23 मार्च से अब तक लगभग 5.7 लाख ऐसे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जिनमें से हाल ही में एक ही दिन में 71,000 से अधिक यूनिट बेची गईं.

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