नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने कहा कि नागरिकत संशोधन अधिनियम के विरोध के दौरान पुलिस ने गोली नहीं चलाई थी. वहीं, बिजनौर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले 20 वर्षीय छात्र को आत्मरक्षा में गोली मारी गई थी. एक अखबार से बात करते हुए, बिजनौर पुलिस अधीक्षक, संजीव त्यागी ने कहा कि 20 वर्षीय मोहम्मद सुलेमान को उनकी सर्विस पिस्टल से कांस्टेबल मोहित कुमार ने गोली मारी थी.

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संजीव त्यागी ने द इंडियन एक्सप्रेस को यह भी बताया कि सुलेमान के शरीर से एक कारतूस बरामद किया गया था. “बिजनौर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) से जुड़े कांस्टेबल मोहित कुमार को भी गोली लगी. गोली देश-निर्मित हथियार से मारी गई थी. खबरों की मानें तो सुलेमान ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में था. वह नोएडा में अपने रिश्तेदार के घर में रहकर सिविल सर्विसेज के पेपर की तैयारी कर रहा था. अपनी बीमारी के कारण वह अपने घर से नोएडा आया था. बता दें कि इस कानून का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश में अब तक एक 8 साल के बच्चे समेत कम से कम 18 लोग मारे जा चुके हैं.

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने पिछले हफ्ते कहा था कि सभी मौतें क्रॉस-फायरिंग में हुईं और पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट हो जाएगा. उन्होंने कहा, ”हम इस पर स्पष्ट और पारदर्शी हैं. यदि हमारी गोलीबारी के कारण किसी की भी मृत्यु हुई, तो हम न्यायिक जांच करेंगे और कार्रवाई करेंगे. लेकिन हमारी तरफ से कुछ नहीं हुआ” नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्यवाई जारी है. यहां अब तक 925 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि 5558 लोगों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है. इस बीच, लखनऊ में अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कल रात 8 बजे तक इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का फैसला किया है. सीएए के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सेवाएं बंद कर दी गईं.