इंदौर: केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने शनिवार को नये कृषि कानूनों को वर्ष 2022 तक अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने का साधन बताया और दावा किया कि इन प्रावधानों के खिलाफ जारी आंदोलन में देश के केवल एक-दो फीसद किसान शामिल हैं. Also Read - सरकार और किसानों की आज होने वाली बैठक टली, अब 20 जनवरी को होगी अगली मीटिंग

ठाकुर ने यहां कम्पनी सचिवों के 48वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा, “देश के मात्र एक-दो प्रतिशत किसान इस आंदोलन में शामिल हैं जिन्हें भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है. आप (नये कृषि कानूनों के विरोधी) पूरे देश के किसानों की आय वृद्धि पर रोक लगाना चाहते हैं, यह उचित नहीं है.” उन्होंने कहा, “मीडिया का एक वर्ग दिखाता है कि (नये कृषि कानूनों के खिलाफ) आंदोलन में कई किसान शामिल हैं, लेकिन उन 95 फीसद किसानों को भी दिखाइए जो इन कानूनों से खुश हैं.” Also Read - Kisan Andolan: 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने पर अडिग किसान यूनियन, आज सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

ठाकुर के मुताबिक देश के ज्यादातर किसानों ने नये कृषि कानूनों के लिए नरेंद्र मोदी सरकार का शुक्रिया अदा किया है क्योंकि इन प्रावधानों से वर्ष 2022 तक उनकी आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी. Also Read - 26 जनवरी को परेड निकालेंगे प्रदर्शनकारी किसान, बोले- आंदोलन का समर्थन करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज कर रही NIA

उन्होंने भाजपा के विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में भ्रम फैलाया जा रहा है कि नये कृषि कानूनों के अमल में आने के बाद मोदी सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीदने की व्यवस्था खत्म कर देगी.

वित्त राज्य मंत्री ने कहा, “हमने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की पिछली सरकार के मुकाबले न केवल फसलों का एमएसपी बढ़ाया, बल्कि इन दरों पर किसानों की उपज की सरकारी खरीद में भी इजाफा किया.”

उन्होंने जोर देकर कहा, “नये कृषि कानूनों ने किसानों को यह आजादी दी है कि वे अपनी फसलें मनमुताबिक दाम पर देश के किसी भी कोने में बेच सकते हैं.”