नई दिल्ली: चीन के साथ सीमा टकराव के बीच केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने विद्युत प्रणाली की सुरक्षा को अधिक चाक-चौबंद करने के लिये इसमें देश में विनिर्मित उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ अब चीन जैसे पड़ोसी देशों से बिजली उपकरण आयात करने से पहले उसकी मंजूरी लेना अनिवार्य करने का निर्णय किया है. मंत्रालय का यह भी निर्णय है कि आयातित बिजली उपकरणों की साइबर सुरक्षा की दृष्टि से भारत की प्रयोगशालाओं में कड़ाई से जांच होगी. इसके साथ ही बिजली पारेषण और अन्य संबंधित प्रणालियों पर साइबर हमलों के खिलाफ निगरानी और उससे बचाव की रणनीति तैयार करने के लिये केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अंतर्गत एक समिति भी बनायी गयी है. Also Read - चीन की बढ़ेंगी मुश्किलें! कहां से निकला कोरोना वायरस? जांच के लिए अगले हफ्ते चाइना जाएगी डब्ल्यूएचओ की टीम

बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने ‘भाषा’ के साथ विशेष बातचीत में कहा, ‘‘बिजली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है. बिजली क्षेत्र को अगर नुकसान पहुंचाया जाता है तो देश में विकास का पहिया बिल्कुल ठप हो जाएगा. इसका कारण रक्षा समेत सभी उद्योगों और संचार व्यवस्था तथा डेटा बेस के लिये बिजली चाहिए. आप 12 से 24 घंटे के लिये वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं लेकिन उसके बाद बिजली चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इसको ध्यान में रखते हुए हमने कदम उठाना शुरू कर दिया है. हमने निर्णय किया है कि देश में जो भी बिजली उपकरण बन रहे हैं, उद्योग यहीं से ले. और जिन उपकरणों का यहां विनिर्माण नहीं होता, हम उसके लिये दो-तीन साल में विनिर्माण ढांचा तैयार करेंगे. इस बीच उन उपकरणों के आयात की मंजूरी होगी.’’ Also Read - लद्दाख के निमू में पीएम मोदी ने की थी सिंधु दर्शन पूजा, सामने आया ये VIDEO

मंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन जो भी उपकरण आयात होंगे, उनका देश के प्रयोगशालाओं में गहन परीक्षण होगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसमें ‘मालवेयर’ और ‘ट्रोजन होर्स’ का उपयोग तो नहीं हुआ है. उसी के बाद उसके उपयोग की अनुमति होगी.’’ मालवेयर ऐसा साफ्टवेयर या प्रोग्राम होता है जिससे फाइल या संबंधित उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. वहीं ट्रोजन होर्स मालवेयर साफ्टवेयर है जो देखने में तो उपयुक्त लगेगा लेकिन यह कंप्यूटर या दूसरे साफ्टवेयर को नुकसान पहुंचा सकता है. इसे इस रूप से तैयार किया जाता है जिससे डेटा या नेटवर्क को बाधित किया जा सके, आंकड़े गायब किये जा सके या नुकसान पहुंचाया जा सके. Also Read - साउथ चाइना सी में यूएस नेवी के दो विमानवाहक युद्धपोतों का अभ्‍यास, तनाव में चीन

देश के बिजली क्षेत्र को पूर्व में मुख्य रूप ये चीन, सिंगापुर और रूस जैसे देशों से साइबर हमले का सामना करना पड़ा है. सिंह ने यह भी कहा, ‘‘ हमने साइबर हमलों की आशंका को देखते हुए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की अगुवाई में एक समिति बनायी है. समिति साइबर हमले की खतरे की स्थिति का पता लगाने और उससे निपटने के उपायों का सुझाव देगी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा जिन उपकरणों के आयात की जरूरत है, वो किये जा सकेंगे. लेकिन चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से जिनसे भारत को खतरा है या खतरे की आशंका है, आयात को लेकर पहले से मंजूरी लेनी होगी. बल्कि हम यह करेंगे कि ‘प्रायर रेफरेंस कंट्री’ खासकर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से आयात के बजाए अन्य देशों से आयात हो.’’ ‘प्रायर रेफरेंस कंट्री’ यानी पूर्व संदर्भ देशों की श्रेणी में उन्हें रखा जाता है जिनसे भारत को खतरा है या खतरे की आशंका है. मुख्य रूप से इसमें वे देश हैं जिनकी सीमाएं भारतीय सीमा से लगती हैं. इसमें मुख्य रूप से पाकिस्तान और चीन है.

उल्लेखनीय है कि ये कदम ऐसे समय उठाये जा रहे हैं, जब हाल में लद्दाख में सीमा विवाद के बीच भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गये.

मंत्री ने कहा, ‘‘यह देखा गया है कि जो उपकरण देश में बन रहे हैं, उसका भी आयात किया जा रहा है. इसका कारण कुछ देशों खासकर चीन द्वारा डंपिंग यानी काफी सस्ते दाम पर निर्यात करना है. इसीलिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने उपकरणों के आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क और रक्षोपाय शुल्क लगाता रहा है.’’ देश में वर्ष 2018-19 में 71,000 करोड़ रुपये का बिजली उपकरणों का आयात हुआ. इसमें बड़ा हिस्सा चीन का है. इसमें नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े उपकरण शामिल नहीं है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस बारे में उद्योग से बात हुई, वे इसको समझ रहे हैं. आइमा (इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैनुफेक्चरर्स एसोसिएशन) ने भी स्थिति की गंभीरत को लेकर ज्ञापन दिया था.