मुंबई। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने अंग्रेजी-माध्यम शिक्षा के अनिवार्य होने की धारणा को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि ना ही उन्होंने और ना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्वेंट से पढ़ाई की है. हमेशा क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने की जरूरत पर जोर देने वाले नायडू ने कहा कि मातृभाषा आंखों की तरह होती हैं और बाकी भाषाएं चश्मे की तरह. Also Read - प्रधानमंत्री मोदी से मीटिंग में सचिन ने उठाया अहम मुद्दा, 'लॉकडाउन के बाद हमें करना होगा ये काम'

विदेशी नेता इंटरप्रेटर का करते हैं इस्तेमाल Also Read - आने वाला कल न भुलाएं, आओ फिर से दीया जलाएं... PM मोदी की अपील में है अटल बिहारी वाजपेयी की इस कविता की झलक

महान गायिका एम एस सुब्बुलक्ष्मी की 102 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में युवा गायकों को सम्मानित करते हुए उन्होंने यह बात कही. कर्नाटक की गायिका का जन्म 16 सितंबर 1916 को हुआ था. Also Read - लॉकडाउन के बाद पहली बार कुछ ही समय में वीडियो संदेश जारी करेंगे पीएम मोदी

उन्होंने कहा कि विदेशी नेता (अंग्रेजी ना बोलने वाले देशों के) भारत आ कर अंग्रेजी में बात नहीं करते बल्कि वे इंटरप्रेटर का इस्तेमाल करते हैं. अपनी भाषा का प्रचार करना समय की मांग है क्योंकि संस्कृति और भाषा एक साथ चलती हैं. इससे आप आम लोगों को और बेहतर तरह से समझ पाते हैं. मातृभाषा आपकी आंखें हैं और अन्य भाषाएं चश्मे. अगर आपके पास आंखे नहीं होंगी तो आप कोई भी चश्मा पहन लें, आप अपनी आंख की रोशनी बेहतर नहीं कर पाएंगे.

मैं कभी कॉन्वेंट नहीं गया

नायडू ने कहा कि अंग्रेजी-माध्यम की शिक्षा की अनिवार्यता पर बात की जाती है पर क्या यह किसी के व्यक्तिगत विकास के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा, आप से यह किसने कहा? क्या पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की थी? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉन्वेंट स्कूल गए थे. मैं भी कॉन्वेंट स्कूल नहीं गया लेकिन भारत का उप राष्ट्रपति हूं.