नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान के खिलाफ 1965 और 1971 में युद्ध लड़ने वाले पूर्व सैनिकों को स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पेंशन दी जा सकती है. इसके लिए सेना की ओर से प्रस्‍ताव भेजा गया है. यह बात मंगलवार को आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने कही. बता दें जनरल नरवने ने 31 दिसंबर को जनरल बिपिन रावत से सेना प्रमुख का कार्यभार संभाला था. Also Read - Jammu & Kashmir: Shopian Encounter में LeT के तीन आतंकी ढेर, एक SPO शहीद, एक घायल

सेना प्रमुख नरवाने ने कहा, आर्मी ने 1965 और 1971 में युद्ध लड़ने वाले पूर्व सैनिकों को स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पेंशन देने का प्रस्‍ताव रखा है. बता दें कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच आर्मी ने 1965 और 1971 में बड़े युद्ध लड़े हैं और दुश्‍मन पर निर्णायक विजय हासिल की थी. Also Read - Photos: Uttarakhand में चौथे दिन का रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन, दिन-रात जुटे हैं 600 से ज्‍यादा बचाव-कर्मी

सेना प्रमुख एमएम नरवाने कहा कि सेवानिवृत्त होने के बाद, दिग्गज अभी भी विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र निर्माण में व्यस्त हैं. दिग्गजों का कल्याण हमेशा हमारी प्राथमिकता है. पिछले साल, हमने 240 अधिकारियों और 11,500 जेसीओ को सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी पाने में मदद की. Also Read - Saral Pension Yojana: आराम से गुजरेंगे बुढ़ापे के दिन, इस दिन से शुरू होगी ये नई पेशन योजना, ऐसे करें Online Apply

चौथे सशस्त्र बल वेटरन्‍स डे पर आर्मी चीफ नरवाने कहा, हम महिलाओं को सैन्य पुलिस में शामिल कर रहे हैं. कुल 1700 वाहिनी सैन्य पुलिस में शामिल की जाएगी. इस वर्ष 6 जनवरी से 101 महिलाओं का प्रशिक्षण शुरू किया जा चुका है.

सुर्खियों में है नए सेना प्रमुख का ये बयान
बीते शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में सेना प्रमुख ने कहा था, ”जहां तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की बात है तो पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा होने संबंधी संसद का कई साल पुराना प्रस्ताव है. अगर संसद चाहेगी कि वह हिस्सा भी हमारा होना चाहिए और अगर इसका आदेश हमें मिले तो निश्चित तौर पर हम कार्रवाई करेंगे.”

1994 में संसद में पारित हुआ था ये प्रस्ताव
सेना प्रमुख फरवरी 1994 में पारित संसद के प्रस्ताव का उल्लेख कर रहे थे, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर का इलाका खाली करना चाहिए जिस पर आक्रमण के जरिए कब्जा किया गया है.