नई दिल्ली. थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बृहस्पतिवार को कहा कि सेना अगले कुछ महीने में व्यापक सुधार और सांगठनिक पुनर्गठन करेगी. सेना की मारक क्षमता में इजाफे के लिए समग्र योजना के तहत इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) शुरू करने का भी फैसला किया गया है. उन्होंने कहा कि सेना में आधुनिकीकरण के लिए और ज्यादा धनराशि की जरूरत है. सेना प्रमुख ने कहा कि अगले एक साल में इनफैन्ट्री (पैदल सेना) आधुनिकीकरण और मिसाइलों, हमलावर हेलिकॉप्टरों और अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियों की खरीदारी प्राथमिकता में होगी.

आईबीजी गठित करने के फैसले को सेना की मारक क्षमता में व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलने के तौर देखा जा रहा है. इस आईबीजी में वायु शक्ति, आयुध, बख्तरबंद कोर की ताकतों सहित फौज की विभिन्न इकाइयां शामिल होंगी. 15 जनवरी को सेना दिवस से पूर्व संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए थल सेना प्रमुख ने कहा कि आईबीजी का परीक्षण मई में युद्धाभ्यास के दौरान होगा जिसके बाद इसे शुरू किया जाएगा. तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करने के एक दिन बाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि यही रुख जम्मू कश्मीर में नहीं अपनाया जा सकता. जनरल रावत ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में आतंकवादी समूहों के साथ कोई भी बातचीत सरकार द्वारा तय शर्तों के आधार पर ही होगी. जनरल रावत से बुधवार को ‘रायसीना डायलाग’ में अपने संबोधन में अफगानिस्तान में तालिबान के साथ वार्ता का समर्थन किया था.

सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि इमरान खान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद जम्मू कश्मीर सीमा पर भारत के प्रति पाकिस्तान के आक्रामक व्यवहार में कोई कमी नहीं आई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नेता केवल शांति की बात कर रहे हैं और जमीन पर स्थिति में सुधार के लिए कुछ भी नहीं कर रहे. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार कश्मीर से निपटने के लिए कड़ा और नरम रुख अपना रही है…, हम जम्मू कश्मीर में शांति के लिए केवल सहायक है.’’उन्होंने तालिबान के साथ वार्ता में कई देशों के शामिल होने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को इससे अलग नहीं रहना चाहिए क्योंकि अफगानिस्तान में उसके ‘‘हित’’ हैं।