नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 35-ए (Article 35A) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी गर्म है. इस अनुच्छेद को लेकर राज्य में सभी पार्टियां एकजुट होती दिख रही हैं और सभी ने इसे एकसुर में बनाए रखने की बात कही है. यह अनुच्छेद तब लोगों के चर्चा के केंद्र में आ गया जब हाल ही में कश्मीर की दो महिलाएं इसको चुनौती देते हुए इस तर्क के साथ उच्चतम न्यायालय पहुंची कि यह अनुच्छेद उनके बच्चों को बेदखल करता है. हाल ही में एक कार्यक्रम में महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि अगर अनुच्छेद 35 ए के साथ छेड़छाड़ किया जाता है तो कश्मीर में कोई तिरंगा थामनेवाला नहीं होगा.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला तो यहां तक कह चुके हैं कि अगर 35A हटाया जाता है तो राज्य में बड़ा विद्रोह होगा. गुरुवार को इस मुद्दे पर मुफ्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी करने वाली हैं. आइए जानें कि अनुच्छेद 35-ए से जुड़ी जरूरी बातें…

अनुच्छेद 35-ए संविधान का वह अनुच्छेद है जो जम्मू कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को पारभाषित कर सके. साल 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ दिया गया. आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है. साल 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया.

जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो. साल 2014 में एक एनजीओ ने अर्जी दाखिल कर इस आर्टिकल को समाप्त करने की मांग की. यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है.
इस याचिका पर अगले महीने अंतिम सुनवाई होनी है. राज्य सरकार इस आर्टिकल को हटाए जाने के खिलाफ है.

अनुच्छेद 35ए मामले में केंद्र की मदद लें, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने महबूबा से कहा

राजनीतिक सूत्रों ने कहा कि जम्मू कश्मीर में मुख्य विपक्षी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सरकार को सलाह दी कि वह अपनी सहयोगी बीजेपी और केंद्र सरकार से राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधानों को बदलने के प्रयासों के खिलाफ मदद मांगे. संविधान के अनुच्छेद 35ए के तहत धारा 370 के जरिये राज्य को विशेष दर्जा मिला हुआ है और इसे लेकर छिड़ी बहस के बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती बुधवार शाम अचानक नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला के आवास पर पहुंची थीं और इसी दौरान उन्हें यह कहा गया.

सूत्रों ने कहा कि विधानसभा में 15 विधायकों वाली पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह समझाने की जरूरत है कि वह इस मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट में राज्य के विशेष दर्जे का बचाव करें.