नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जे देने वाले अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के लिए संसद ने मंजूरी दे दी है. जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 लोकसभा में भारी मतों की जीत के साथ पारित हो गया है. नरेंद्र मोदी सरकार की लोकसभा में बड़ी जीत हुई है. इसके पक्ष में 367 वोट डले जबकि विपक्ष में 67 वोट डाले गए.

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इससे पहले संसद में इसे लेकर लंबी चर्चा हुई. बहस-हंगामे के बाद वोटिंग हुई और जैसा कि पहले से ही तय था, लोकसभा में भी ये बिल पास हो गया. एक दिन पहले राज्यसभा में ये बिल पास हुआ था. आज इस पर लोकसभा में चर्चा के बाद वोटिंग हुई. कांग्रेस सहित कई दल इसका विरोध कर रहे थे. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल राजयसभा में पास होने के बाद पीएम मोदी ने अमित शाह की पीठथपाकर उन्हें बधाई दी थी. एक दिन पहले ही इसे लेकर लगातार जारी हलचल के बीच जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला को भी हिरासत में लिया गया था. फारूक अब्दुल्ला ने भी खुद को हिरासत में लिए जाने की बात कही थी, जिसे आज अमित शाह ने नकार दिया और कहा कि वह खुद ही संसद में नहीं आना चाहते.

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वहीं, इसे लेकर कश्मीर के लोगों का कहना है कि उन्हें बेहद निराशा हुई है. हमारा जैसे सब कुछ छिन गया है. अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के सरकार के फैसले के मद्देनजर कश्मीर के लोगों ने घाटी में हिंसा का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई और कहा कि इससे राज्य की मुस्लिम बहुलता वाली पहचान में बदलाव हो सकता है. यहां आए श्रीनगर निवासी फारूक अहमद शाह (50) ने कहा, ‘हम फैसले से चकित हैं और इसने हमें निराश कर दिया है क्योंकि इस अनुच्छेद के साथ हमारी भावनाएं जुड़ी थीं.’ उन्होंने कहा कि अनुच्छेद को खत्म किए जाने से लोगों का गुस्सा भड़क सकता है. जम्मू भ्रमण पर आए घाटी निवासी 20 वर्षीय अर्शिद वारसी ने कहा, ‘वे (सरकार) हमें कब तक नजरबंद रखेंगे?’ उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि ‘हम अपना आक्रोश व्यक्त नहीं कर सकते.’

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इस बिल को लेकर पाकिस्तान में भी हलचल है. पाकिस्तान इसे लेकर यूएन जाने की बात कह रहा है. इसके साथ ही यह भी कह रहा है कि वह कश्मीरियों की मदद के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. इस पर अमेरिका की भी नजर है. अमेरिका ने कहा कि कश्मीरी नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर चिंता व्यक्त की. और प्रभावित लोगों से बात करने का आग्रह किया. नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भी शांति और स्थिरिता बनाए रखने का आग्रह किया है. वहीं, श्रीलंका ने इसे भारत का आंतरिक मसला बताकर खुद को किनारे कर लिया. तुर्की ने इस मामले में पाकिस्तान का साथ देने की बात कही है.

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आइए कुछ बिंदुओं के माध्यम से जानते हैं इस महत्वपूर्ण अनुच्छेद के बारे में.

धारा 370

1- अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन किसी अन्य विषय से जुड़े कानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए.

2- इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती.

3- इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है.

4- 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.

5- इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते.

6- भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती.

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