नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को तीन दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन कई सवालों का जवाब दिया. उन्होंने राम मंदिर निर्माण और जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को स्वीकार नहीं करता है. ये अनुच्छेद जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देते हैं. इस पर हमारी सोच सबके सामने स्पष्ट है. हम उनको नहीं मानते, यानी वो नहीं रहना चाहिए ऐसा हमारा मत है.

जल्द बने राम मंदिर

राम मंदिर के मुद्दे पर मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर का शीघ्र निर्माण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण जल्द होना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर वार्ता का समर्थन किया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय राम मंदिर समिति को करना है जो राम मंदिर के निर्माण के लिए अभियान की अगुवाई कर रही है. संघ प्रमुख ने कहा कि उन्हें यह नहीं मालूम कि राम मंदिर के लिए अध्यादेश जारी किया जा सकता है क्योंकि वह सरकार के अंग नहीं हैं. उन्होंने कहा कि क्या अध्यादेश जारी किया जा सकता है और इसे कानूनी चुनौती मिल सकती है., ऐसे मुद्दों पर विचार किया जाना चाहिए.

धर्मांतरण को बताया गलत

उन्होंने राज्य के अधिक विकास की वकालत की. यह राज्य के लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिये जरूरी है. एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि अवैध और अनुचित तरीके से धर्मांतरण गलत है. हिंदुत्व पर एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि हिंदुत्व के खिलाफ कोई गुस्सा नहीं है और इसकी स्वीकार्यता दुनियाभर में बढ़ रही है. संघ प्रमुख ने कहा कि अन्य मतपंथों के साथ तालमेल करने वाली एकमात्र विचारधारा ये भारत की विचारधारा है, हिंदुत्व की विचारधारा है. पहचान की दृष्टि से, राष्ट्रीयता की दृष्टि से भारत में रहने वाले सबलोग हिंदू ही हैं.

अंतरजातीय विवाह के खिलाफ नहीं है संघ, भारत में रहने वाले सभी हिंदू: मोहन भागवत

महिलाओं की सुरक्षा और बलात्कार की बढ़ती घटनाओं से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें ऐसा माहौल बनाना होगा जहां महिलाएं सुरक्षित महसूस करें. उन्होंने कहा कि पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना सीखना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय को अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिये क्योंकि वे समाज का हिस्सा हैं. साथ ही समलैंगिकों के अधिकार ही एकमात्र ज्वलंत मुद्दा नहीं है जिसपर चर्चा की जानी चाहिये. भागवत ने कहा कि समय बदल रहा है और समाज को ऐसे मुद्दों पर फैसला करना चाहिये.

आबादी संतुलन के लिए नीति बने

मोहन भागवत ने देश में आबादी का संतुलन कायम रखने के लिए एक नीति बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इसके दायरे में समाज के सभी वर्ग होने चाहिए. उन्होंने कहा कि शुरुआत उन लोगों से की जानी चाहिए जिनके अधिक बच्चे हैं और उनके पालन-पोषण के लिए सीमित साधन हैं. साथ ही भागवत ने विभिन्न समुदायों के लिए आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था का पुरजोर समर्थन किया. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

भारत के विभिन्न भागों में बदल रहे आबादी के संतुलन और घटती हिन्दू आबादी के बारे में एक प्रश्न पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विश्व भर में आबादी संतुलन को महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे यहां भी कायम रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए जनसंख्या पर एक नीति तैयार की जानी चाहिए. अगले 50 साल में देश की संभावित आबादी और इस संख्या बल के अनुरूप संसाधनों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.