नई दिल्ली। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने आज इमरजेंसी को लेकर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को निशाने पर लिया. जेटली ने कहा कि इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को संवैधानिक तानाशाही में बदल दिआ था. जेटली ने कहा कि जिस आम आदमी ने तानाशाही का सही अर्थ नहीं समझा था उसने इसे इमरजेंसी के दौरान जबरन नसबंदी के कारण जान लिया. फेसबुक पर लिखे पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने इंदिरा गांधी की तुलना जर्मनी के तानाशाह हिटलर से भी की.
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25 जून 1975 को लगा आपातकाल Also Read - Arun Jaitley Death Anniversary: अरुण जेटली की पुण्यतिथि पर भावुक हुए PM मोदी, कहा- 'मुझे अपने दोस्त की बहुत याद आती है'

जेटली ने कहा, इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लगाया था. इस दिन लोगों के आधारभूत अधिकार छीन लिए गए जो संविधान ने उन्हें प्रदान किए थे. हिटलर और इंदिरा गांधी दोनों ने संविधान की धज्जियां उड़ाई थीं. उन्होंने रिपब्लिकन संविधान का इस्तेमाल करते हुए लोकतंत्र को तानाशाही में बदल दिया था. हिटलर ने संसद के अधिकतर नेताओं को गिरफ्तार करवा दिया था और अपनी अल्पमत की सरकार को संसद में दो तिहाई का साबित कर दिया. Also Read - राजस्थान: राजीव गांधी की जयंती पर शुरू हुई 'इंदिरा रसोई', सिर्फ 8 रुपए में मिलेगा खाना

कानून में किया बदलाव

अरुण जेटली ने लिखा, जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन कर ऐसे प्राविधान जोड़े गए जिससे इंदिरा गांधी का अवैध चुनाव कानून में बदलाव के बाद वैध साबित हो जाए. हिटलर के उलट इंदिरा गांधी ने भारत को वंशवादी लोकतंत्र की तरफ मोड़ दिया.

छीन लिए गए थे सभी अधिकार

जेटली ने लिखा, इंदिरा गांधी ने धारा 352 के तहत आपातकाल लगाया था, धारा 359 के तहत मूलभूत अधिकार छीन लिए गए और उन्होंने दावा किया था कि विपक्ष ने स्थिति बिगाड़ने की योजना बनाई थी जिसके बाद ऐसा फैसला लेना पड़े. जेटली ने बताया कि कैसे मीडिया पर पाबंदी लगा दी गई और नेशनल हेराल्ड के रिए सिंगल पार्टी डेमोक्रेसी का विचार धकेला गया. मीडिया को पूरी तरह डराकर रखा गया. अधिकतर एडिटर और पत्रकारों ने सरेंडर कर दिया और तानाशाही में रहने पर मजबूर कर दिए गए. नेशनल हेराल्ड ने अपने एडिटोरियल में लिखना शुरू कर दिया कि अब सिंगल पार्टी डेमोक्रेसी का वक्त आ गया है.  25-26 जून की मध्यरात्रि को विपक्ष के प्रमुख नेताओं को जेल के सींखचों के भीतर डाल दिया गया.