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नई दिल्ली, 9 फरवरी | केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि भारत के पास भी औपचारिक युद्ध इतिहास होना चाहिए और इसे हर बच्चे को पढ़ना चाहिए। शास्त्री भवन में ‘इंडिया-2015 रिफ्रेंस एनुएल’ के उद्घाटन अवसर पर जेटली ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय को इस पर काम करने का सुझाव दिया है। ‘इंडिया-2015 रिफ्रेंस एनुएल’ के प्रकाशन को 59 साल पूरे हो गए हैं। Also Read - Year Ender 2019: भारतीय राजनीति के वो स्तंभ जिन्होंने इस साल कह दिया दुनिया को 'अलविदा'  

उन्होंने कहा, “मैंने रक्षा मंत्रालय को सुझाव दिया है और मुझे बताया गया है कि वे भारत के युद्ध इतिहास पर तेजी से काम कर रहे हैं।” मंत्री ने कहा, “भारत उन कुछ देशों में है, जिसके पास अपने युद्ध इतिहास का औपचारिक दस्तावेज नहीं है। पिछले साल, मुझे प्रथम विश्व युद्ध की 100वीं बरसी से संबंधित कार्यक्रम पर न्योता दिया गया था और मैंने पहली बार यह महसूस किया कि विश्व युद्ध में हिस्सा लेने वाले सबसे अधिक भारतीय थे।” यह भी पढ़ें– अरुण जेटली: आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं

उन्होंने कहा, “12 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था, 70 हजार से अधिक को जान गंवानी पड़ी थी। यह ऐसा तथ्य है जो अधिकांश भारतीय नहीं जानते होंगे।”

जेटली ने रिफ्रेंस एनुएल के बारे में कहा, “मुझे भरोसा है कि यह हमारे सभी पुस्तकालयों के लिए बेहद अच्छा संस्करण होगा और विशेषकर इसका सभी ब्योरा इस साल से डिजिटल रूप में उपलब्ध होगा। यह पूरी दुनिया में नि:शुल्क उपलब्ध होगा।”