नई दिल्ली: हाल के दिनों में एक के बाद एक आर्थिक विशेषज्ञों के सरकार का साथ छोड़ने की खबरों के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली अपनी सरकार के बचाव में आए हैं. आरबीआई के गवर्नर रहे उर्जित पटेल के इस्तीफे के चलते आलोचना झेल रही केंद्र सरकार के वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने पटेल को इस्तीफा देने को नहीं कहा था. जेटली ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने कभी भी उर्जित पटेल से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर पद से इस्तीफा नहीं मांगा था. उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों को निशाने पर लेते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी की सरकारों तथा यशवंत सिन्हा के वित्त मंत्री रहने के दौरान किस तरह केंद्रीय बैंक के प्रमुखों को इस्तीफे के लिये मजबूर किया गया. Also Read - नारायणसामी ने किया किरण बेदी पर जुबानी हमला, कहा- केंद्र ने ‘राक्षस’ को किया नियुक्त 

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वित्तमंत्री ने चुनिंदा क्षेत्रों के लिए कर्ज पर धन की तंगी को दूर करने समेत विभिन्न मुद्दों का समाधान निकालने की अपनी सरकार की रिजर्व बैंक से मांग का बचाव करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कोई खतरा नहीं है. पटेल को नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में गवर्नर बनाया था. कुछ क्षेत्रों के लिए कर्ज की तंगी जैसे कुछ मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच मतभेदों की चर्चा के बीच पटेल ने आश्चर्यजनक तरीके से 10 दिसंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. कई लोगों का यह मानना है कि विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के दबाव के कारण पटेल ने इस्तीफा दिया. Also Read - राहत की खबरः सरकार ने 33 वस्तुओं पर घटाई GST की दर, सिनेमा के टिकट भी हो जाएंगे सस्ते

जेटली ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा, ‘‘सरकार को उनसे इस्तीफे की उम्मीद नहीं थी.’’ उन्होंने इस मौके पर उन वाकयों का जिक्र किया जब रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नरों ने अपने पद से इस्तीफा दिया था. जेटली ने कहा, ‘‘सबसे पहली बार 1955 में रिजर्व बैंक के गवर्नर ने इस्तीफा दिया था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तत्कालीन गवर्नर बी.रामा राव को कहा था कि आर्थिक नीतियां सरकार तय करेगी और रिजर्व बैंक सिर्फ मौद्रिक नीति तय करेगा. नेहरू ने राव को कहा था कि रिजर्व बैंक की अन्य नीतियां सरकार की आर्थिक नीतियों के सादृश्य होगी और सुझाव दिया कि राव इस्तीफा दे दें जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.’’

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इंदिरा गांधी के समय मारुति को विस्तृत ऋण देने से इंकार करने पर तत्कालीन गवर्नर सरुक्कई जगन्नाथन को इस्तीफा देना पड़ा था. जेटली ने कहा, ‘‘अभी रिजर्व बैंक की स्वायत्तता के पक्षधर बने यशवंत सिन्हा जब चंद्रशेखर सरकार में वित्तमंत्री थे, तब उन्होंने तत्कालीन गवर्नर आर.एन.मल्होत्रा को बुलाकर कहा था कि मैं आपका इस्तीफा चाहता हूं.’’ उन्होंने कहा कि विश्व में कई केंद्रीय बैंक आरक्षित कोष के तौर पर कुल संपत्ति का आठ प्रतिशत अपने पास रखते हैं. कुछ अनुदार केंद्रीय बैंक 13-14 प्रतिशत संपत्ति रखते हैं. हालांकि, रिजर्व बैंक अपने पास 28 प्रतिशत रखता है.

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जेटली ने कहा, ‘‘2013 में तत्कालीन सरकार ने केंद्रीय बैंक से कहा था कि आपके पास 1.46 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त हैं और यह राशि आप सरकार को दें, तब किसी ने नहीं कहा कि सरकार केंद्रीय बैंक को लूट रही है.’’ उन्होंने कहा कि आरक्षित कोष का इस्तेमाल सार्वजनिक बैंकों में पूंजी झोंकने तथा गरीब लोगों के भले की योजनाओं के लिए किया जा सकता है.

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जेटली ने कहा, ‘‘मुझे यह राशि राजकोषीय घाटा कम करने या सरकारी खर्च के लिए नहीं चाहिये. इसके लिए मुझे एक भी रुपये की जरूरत नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे सरकार का राजकोषीय अनुशासन का सबसे शानदार रिकॉर्ड है और इस साल भी हम इसके लक्ष्य को पा लेंगे. अत: राजकोषीय घाटा लक्ष्य को हासिल करने के लिये मुझे किसी तरह के पैसे की जरूरत नहीं है.’’