नई दिल्लीः पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार दोपहर में निधन हो गया है. वह 66 साल के थे. उन्हे सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को एम्स में भर्ती करवाया गया था. एम्स ने 10 अगस्त के बाद से जेटली के स्वास्थ्य पर कोई बुलेटिन जारी नहीं किया था. रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को उनकी तबियत कुछ ज्यादा ही बिगड़ गई थी. उन्होंने आज दोपहर 12.07 बजे अंतिम सांस ली. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल तक उन्होंने कई अहम मंत्रालय संभाला. वह भाजपा के एक कद्दावर नेता होने के साथ-साथ देश के जानेमाने वकील थे.

जेटली ने खराब स्वास्थ्य के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था. एम्स में भर्ती किए जाने के बाद से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित सरकार के सभी मंत्री जेटली के स्वास्थ्य का हालचाल जानने एम्स जा चुके थे. पिछली रिपोर्ट में कहा गया था कि जेटली को लाइफ सपोर्ट सिस्मट पर रखा गया था. इस सिस्टम के बगैर उनके अहम अंग काम नहीं कर रहे थे.


इस बारे में एम्स ने एक बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि पूर्व वित्त मंत्री ने 12.07 बजे अंतिम सांस ली. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी हैदराबाद की यात्रा बीच में छोड़कर दिल्ली लौटने की बात कही है. अरुण जेटली लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

पेशे से वकील जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उनकी कैबिनेट का महत्वपूर्ण हिस्सा थे. उनके पास वित्त और रक्षा मंत्रालय का प्रभार था और सरकार के लिए वह संकटमोचक की भूमिका में रहे. खराब स्वास्थ्य के कारण जेटली ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. पिछले साल 14 मई को एम्स में उनके गुर्दे का प्रतिरोपण हुआ था. उस समय रेल मंत्री पीयूष गोयल को उनके वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गयी थी.

पिछले साल अप्रैल की शुरुआत से ही वह कार्यालय नहीं आ रहे थे और वापस 23 अगस्त 2018 को वित्त मंत्रालय आए. लंबे समय तक मधुमेह रहने से वजन बढ़ने के कारण सितंबर 2014 में उन्होंने बैरिएट्रिक सर्जरी करायी थी.