नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आधार कार्ड को एक ‘गेम चेंजर’ के तौर पर विकसित करने के लिए ‘निर्णायक’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय देते हुए रविवार को कहा कि विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) की सहायता से सरकार ने पिछले कुछ सालों में कई नकली और फर्जी लाभकर्ताओं को हटाकर लगभग 90,000 करोड़ रुपये की बचत की है. मोबाइल फोन नंबरों और बैंक खातों में ‘आधार’ को एच्छिक करने के सरकार के निर्णय को कानूनी सहयोग प्रदान करने के लिए लोकसभा में विधेयक पारित करने के दो दिन बाद जेटली ने अपने ब्लॉगपोस्ट में कहा कि कांग्रेस की अगुआई वाली भूतपूर्व संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का ‘आधार’ अपने विरोधाभासों और अनिश्चयों के कारण अपर्याप्त था.

जेटली ने कहा, “सरकार का अनुमान है कि ‘आधार’ का उपयोग कर पिछले कुछ सालों में मार्च 2018 तक 90,000 करोड़ रुपये तक बचाए हैं. कई नकली, अस्तित्वहीन और फर्जी लाभकर्ताओं को हटा दिया गया है. “उन्होंने कहा, “विश्व बैंक द्वारा तैयार ‘डिजिटल लाभांश रिपोर्ट’ के अनुमान के मुताबिक भारत ‘आधार’ का उपयोग कर प्रतिवर्ष 77,000 करोड़ रुपये तक बचा सकता है. इस राशि से ‘आयुष्मान भारत योजना’ जैसी तीन बड़ी योजनाएं शुरू की जा सकती हैं.”

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उन्होंने कहा कि संप्रग के ‘आधार’ के गैर-वैधानिक होने के कारण उसमें कई गंभीर कानूनी चुनौतियां सामने आ गई थीं. वित्त मंत्री ने कहा, “संप्रग खुद विभाजित था. नंदन नीलेकणी ने इसे लाने की कोशिश की जबकि एक वरिष्ठ मंत्री ने इसे रोक दिया. प्रधानमंत्री दुविधा में थे. इसकी प्रक्रिया बहुत धीमी रफ्तार से जारी रही.” उन्होंने कहा, “इसको लेकर संप्रग का कानून अपर्याप्त था. उसने यूआईडी जारी करने की कार्यप्रणाली उपलब्ध कराई. इसमें निजता की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं थे.

इसमें इसके उपयोग का उद्देश्य नहीं बताया गया था.” ‘आधार’ के फायदे बताते हुए जेटली ने कहा कि पिछले 28 महीनों में लगभग 122 करोड़ ‘आधार’ कार्ड जारी हो चुके हैं जो देश की वयस्क जनसंख्या का 99 फीसदी है. उन्होंने कहा कि आज तक 2,579 करोड़ सत्यापन हो चुके हैं. उन्होंने कहा, “प्रतिदिन 2.7 करोड़ सत्यापन हो रहे हैं. यूआईडीएआई की क्षमता प्रतिदिन 10 करोड़ सत्यापन करने की है.”