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तुम ही कहो है ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है

मिर्ज़ा ग़ालिब का ये शेर दिल्ली के मीडिया का दर्द बखूबी बयान करता है | दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की आप सरकार ने कार्यभार संभालने के दो दिन के अन्दर ही मीडिया को नाराज़ कर दिया | और नाराज़ ऐसा की उनके उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया प्रेस कांफ्रेंस बीच में ही छोड़ कर चले गए | केजरीवाल सरकार का काम करने का ढंग बिलकुल अलग ही होगा पर इसके लिए क्या वो मीडिया की नाराजगी मोल ले सकते हैं?

ये वही मीडिया है जिसका सहारा उन्होंने लिया था अपनी वापसी के लिए | भले ही अब वो इस बात से मुकर जाएँ लेकिन पिछले दो महीनो से मीडिया ने उनका भरपूर साथ दिया| आप की कोई रैली हो या सभा सबको लोगों तक पहुंचाया गया | लेकिन केजरीवाल जी इस बार कुछ डरे और सहमे से लगते हैं | विधानसभा के अन्दर तो कोई हंगामा होने से रहा | उनके 66 विधायक सारे बिल बिना किसी बहस के पारित कर सकते हैं | जो 3 विपक्ष के विधायक हैं वो विरोध की खानापूर्ति ही कर सकते हैं | मीडिया के लिए मोदी सरकार का रुखा बर्ताव ही काफी नहीं था जो अब केजरीवाल भी उन्हें कुछ वैसे ही पेश आ रहे हैं | बहरहाल यह एक बदलाव है जिसे मीडिया को भी स्वीकारना चाहिए | साथ ही उन्हें अपना काम भी बिना किसी भेदभाव के जारी रखना चाहिए | उनकी जवाबदारी उनके पाठक और दर्शक के प्रति है और जिसको उन्हें हर हाल में पूरा करना पड़ेगा चाहे कोई कितने भी अड़ंगे लगा ले | यह भी पढ़ें: दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बीच में ही प्रेस कांफ्रेंस छोड़कर भागे

ऐसे में मीडिया ही एकमात्र ऐसा ज़रिया बचता है जो सरकार और उसके काम काज की पूछ-परख करे और उसे कटघरे में खड़ा करे | लेकिन केजरीवाल ने पहले दिन ही ये साफ़ कर दिया की वो मीडिया के सवालों का जवाब नहीं देंगे | शपथ लेते ही उन्होंने सफाई दे दी की इस बार वो घर भी लेंगे और उनके मंत्रीगण सरकारी कारों में घूमेंगे भी | केजरीवाल ने ये भी बता दिया था की मीडिया थोडा सब्र रखे और उनसे ये सवाल न करे की वो अपने 70 वादे कितने दिनों में पूरे करेंगे | केजरीवाल सरकार ने पहले दिन ही ये साफ़ कर दिया था की मीडिया को सचिवालय में प्रवेश नहीं मिलेगा | सोमवार को मीडिया ने केजरीवाल सरकार के कार्य करने की शैली को करीब से देख भी लिया | क्या यह पांच सालों का सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा या इसमें कुछ बदलेगा भी ? यह भी पढ़ें: दिल्ली फतह के बाद ‘आप’ की नजर उत्तर प्रदेश पर

जहाँ तक  केजरीवाल का सवाल है वो तो बस मिर्ज़ा ग़ालिब का यही शेर अपनी चिर परिचित अंदाज़ में कह रहे होंगे

आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक…