नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. इस बीच कोरोना संक्रमितों की संख्या दिल्ली में 50 हजार को पार कर चुकी है. वहीं मरने वालों की संख्या भी 2000 के आंकड़े को पार कर चुकी है. बीते 24 घंटे में दिल्ली में 3000 से अधिक कोरोना मामलों की पुष्टि की गई वहीं 66 लोगों की मौत भी दर्ज की है. लेकिन इस बीच दिल्ली सरकार को उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बड़ा झटका दिया है. उपराज्यपाल ने कोरोना मरीजों को होम क्वारंटीन किए जाने पर रोक लगा दी है. Also Read - बिहार: AIIMS- पटना में कोरोना संक्रमण के चलते 2 डॉक्‍टरों ने तोड़ा दम

मतलब साफ है कि अब राष्ट्रीय राजधानी में संक्रमित मरीजों को संस्थागत क्वारंटीन में रहना होगा ना कि होम क्वारंटीन में. इस बाबत राज्यपाल ने आदेश पारित कर कहा कि संक्रमित लोगों को शुरुआती 5 दिन सरकार द्वारा बनाए गए क्वारंटीन सेंटरों में रहना होगा. इसी मामले पर अब दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल आमने सामने आ चुके हैं. Also Read - Bengluru Lockdown: आज से लागू होगा टोटल लॉकडाउन, जानें क्या खुलेगा और क्या नहीं?

इस मामले पर दिल्ली सराकर का कहना है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में होम आइसोलेशन की प्रक्रिया ने अहम योगदान निभाया है. यह एक सफल प्रयासों में से एक है. साथ ही हमने कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षणों वाले और एसिम्पटोमैटिक लोगों को घर पर ही इलाज कर ठीक किया है. साथ ही ICMR द्वारा जारी सभी नियमों का सख्ती से पालन भी किया जा रहा है. Also Read - Lockdown In Haryana Latest News Update: हरियाणा के इन जिलों में लग सकता है लॉकडाउन

इस मामले पर आगे दिल्ली सरकार ने कहा कि कोरोना के साधारण लक्षणों वाले लोगों को होम क्वारंटीन ने अस्पताल जाकर जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया है. ऐसे में होम क्वारंटीन किए जाने पर रोक लगाने से मरीजों के हाथ निराशा लगेगी. साथ ही मरीज क्वांरटीन सेंटर न जाना पड़े इस कारण इलाज से बचेंगे जो कि खतरे की घंटी है. इससे संक्रमण के फैलने का खतरा और भी बढ़ जाएगा.

दिल्ली सरकार ने कहा कि देश भर में ICMR द्वारा जारी नियमों का पालन किया जा रहा है लेकिन दिल्ली में अलग मापदंड़ क्यों? कोरोना के इलाज के लिए अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों की कमी है. ऐसे में क्वारंटीन सेंटरों में देखभाल के लिए इनकी व्यवस्था कैसे की जाएगी साथ ही सरकार के बड़े पैमाने पर क्वारंटीन सेटर्स भी बनाने की आवश्यकता होगी. दिल्ली सरकार का इस बाबत कहना है कि फिलहाल घर पर ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है. उपराज्यपाल के दिए आदेश के तुरंत बाद हजारों बेड्स की मांग बढ़ जाएगी. ऐसे में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम केंद्र सरकार के साथ है लेकिन इस तरह के मनमाने फैसले से दिल्ली को नुकसान होगा. इस फैसले पर उपराज्यपाल को दोबारा विचार करना चाहिए.