नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता के बद से बदतर हो जाने के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील करते हुए, पड़ोसी राज्यों और केंद्र से पराली जलाने को रोकने के उपायों पर साथ बैठकर विमर्श करने को कहा. केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार आरोप-प्रत्यारोप में नहीं पड़ी है, बल्कि पराली जलाने से हो रहे प्रदूषण के समाधान को तलाश रही है. उन्होंने कहा, ‘‘मीडिया हमसे कह रहा है कि आरोप प्रत्यारोप में नहीं पड़ें. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हम यह नहीं करना चाहते. हम किसी को दोष नहीं दे रहे हैं. हम कह रहे हैं कि सभी लोगों को मिल कर समाधान तलाशना चाहिए.’’

उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘ इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. यह हम सब के लिए गंभीर चिंता का मामला है. हमारी सेहत दांव पर लगी है. हमें आरोप-प्रत्यारोप से क्या मिलेगा? हम कह रहे हैं, पराली जलाने से दिल्ली में धुआं हो रहा है और हमें सामूहिक रूप से इसे रोकना है.’’ केजरीवाल ने पराली जलाने को रोकने के लिए केंद्र द्वारा पराली को निपटाने वाली मशीनों के वितरण की धीमी गति पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘‘ पंजाब और हरियाणा में, अब तक 63,000 मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं. इन राज्यों में 27 लाख किसान हैं. सभी किसानों को इन मशीनों का वितरण करने में कितना वक्त लगेगा? कितने समय तक हम इस प्रदूषण को झेलते रहेंगे?’’

केजरीवाल ने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के समाधान पर सभी पड़ोसी राज्यों और केंद्र से साथ बैठ कर दिल्ली में चर्चा करने की अपील की. मुख्यमंत्री ने सोमवार से शुरू हो रही सम-विषम योजना का पालन करने की भी दिल्लीवासियों से अपील की. उन्होंने कहा, ‘‘ मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि इस योजना के दौरान, अगर वे अपनी कार का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं तो वे कार पूल (कार साझा) का उपयोग करें. मैं भी सख्ती से इस योजना का पालन करूंगा.’’ उन्होंने लोगों को सलाह दी कि जब उन्हें सांस लेने में परेशानी हो तो वे मास्क का इस्तेमाल करें.

केजरीवाल ने कहा, ‘‘ मैं स्कूली छात्रों के जरिए मास्क भेज रहा हूं और मैं आपको सलाह देता हूं कि जब आपको सांस लेने में दिक्कत हो तो आप उनका इस्तेमाल करें. मैं दिल्ली के दो करोड़ लोगों को लेकर बहुत चिंतित हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि आप सब की सेहत अच्छी रहे. हम सबको साथ मिलकर प्रदूषण से लड़ना चाहिए.’’ उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्षों पहले तक, दिल्ली में सालभर प्रदूषण रहता था.

मुख्यमंत्री ने अपनी कुछ पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली के लोगों ने प्रदूषण से लड़ने के लिए कई उपाय किए हैं. दिल्ली में 24 घंटे बिजली आती है, जिससे डीजल से चलने वाले जनेटरों का इस्तेमाल खत्म हो गया. इससे भी प्रदूषण काफी कम हुआ. हमने 600 एकड़ भूमि का वनीकरण किया जिससे राज्य में जंगल का दायर बड़ा और प्रदूषण में कमी आई.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के बाहर पूर्व-पश्चिम पेरिफेरल राजमार्ग बनाया जिससे एक स्थान से दूसरी जगह सामान ले जा रहे ट्रक दिल्ली में प्रवेश नहीं कर रहे हैं. केजरीवाल ने कहा, ‘‘ हमने साल के शेष वक्त में प्रदूषण को कम करने के लिए जो कर सकते थे, वे किया है. पराली जलाने से बीते 20 दिनों से दिल्ली में प्रदूषण हो रहा है.’’ एक अलग प्रेस वार्ता में आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि ‘आप’ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से पांच सवाल पूछना चाहती है. आतिशी ने पूछा कि पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा होने के नाते सवाल का जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है कि उनकी सरकार भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए क्या काम कर रही है?

उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा में पराली को जलाने से रोकने के लिए क्या किया है? उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार की ओर से दायर हलफनामे के मुताबिक, उसने रेखांकित किया है कि पराली के उपाय के तौर पर 63 हजार मशीनें वितरित की गई हैं जबकि कुल किसानों की संख्या करीब 22 लाख है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते पांच दिन में संबंधित राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों के साथ आपात बैठक क्यों नहीं बुलाई? आप नेता ने कहा, ‘‘मेरा चौथा सवाल यह है कि केंद्र सरकार उत्तर भारत के सभी पर्यावरण मंत्रियों के साथ आपात बैठक कब बुलाएगी? और मैं आज ही जवाब जानना चाहती हूं.’’

आतिशी ने कहा ‘‘इस साल हमने प्रदूषण देखा है, मैं अगले साल के लिए जानना चाहती हूं कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से निपटने के लिए केंद्र सरकार की समयबद्ध योजना क्या है, क्योंकि पराली जलाने से केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि आधा भारत गंभीर वायु प्रदूषण का सामना कर रहा है.’’ दिल्ली में भयंकर प्रदूषण है. दिल्ली में रविवार को प्रदूषण का स्तर तीन साल के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. परेशान लोगों ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे खराब वायु गुणवत्ता की वजह से शहर छोड़ना चाहते हैं.

दिल्ली में शाम सात बजे एक्यूआई 490 था जो गंभीर श्रेणी में आता है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में शुक्रवार को पराली जलाने से होने वाले धुएं की हिस्सेदारी 46 फीसदी थी. शनिवार को यह घटकर 17 फीसदी हो गई और रविवार को 12 फीसदी रहने का अनुमान है.

(इनपुट भाषा)