मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव रहे राजेंद्र कुमार ने वॉलंटरी रिटायरमेंट (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) मांगा है। साथ ही उन्होंने लेटर भी लिखा है जिसमें उन्होंने लिखा है कि सीबीआई के जरिए उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और झूठे केसों में फंसाया जा रहा है। कुमार ने लिखा है कि एसीबी ने एक महीने तक उन सवालों को लेकर पूछताछ की, जिनका उनसे कोई लेना-देना ही नहीं था।

सीबीआई पर उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे जबरन मेल का एक्सेस हासिल किया गया और धमकी भी दी गई। सीबीआई ने झूठा केस दर्ज किया और पूछताछ के दौरान बार-बार कहा कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा, अगर वह दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान दे दें।

चिट्ठी में कुमार ने सीबीआई पर केस से जुडे लोगों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया, इतना ही नहीं कुमार ने यहां तक कहा कि सीबीआई जैसी एजेंसी बिना सरकार के मंजूरी के ऐसा काम नहीं करती। जाहिर है ये हमला उन्होंने सीधे-सीधे केंद्र सरकार पर किया था।
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राजेंद्र कुमार का कहना है कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के झगड़े में उन्हें मोहरा बनाया गया। अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में चल रही सीबीआई जांच में कुमार ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने ना केवल लोगों को मुझे और मुख्यमंत्री को फंसाने के लिए कहा, बल्कि उन्होंने कई लोगों की पिटाई भी की जिनमें कुछ को स्थायी गंभीर चोटें आईं।

गौरतलब है कि 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी राजेंद्र कुमार पर सीबीआई ने एफआईआर में आरोप लगाया था कि आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश की और 2007 और 2015 के बीच दिए गए ठेकों के कारण दिल्ली सरकार को 12 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया कि ठेके प्रदान करने के लिए अधिकारियों ने तीन करोड़ रुपये से अधिक का अनुचित लाभ भी लिया था।

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के आरोप में बीते चार जुलाई को गिरफ्तार हुए राजेंद्र कुमार को 26 जुलाई को जमानत मिल गई थी। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।