नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मथुरा में आयोजित ‘स्‍वच्‍छता ही सेवा’ मिशन की घोषणा करते हुए जब अपने भाषण के दौरान कहा कि कुछ लोगों के कान पर अगर ‘ओउम’ और ‘गाय’ शब्‍द पड़ता है कि उनके बाल खड़े हो जाते हैं. पीएम ने कहा, ”हमारे देश का दुर्भाग्य है कि कुछ लोगों के कान में अगर ओम शब्द पड़ता है तो उनके कान खड़े हो जाते है, कान में गाय शब्‍द पड़ता है तो बाल खड़े हो जाते है. उनको लगता है कि देश 16वीं-17वीं शताब्दी में चला गया.  इस पर एआईएमआईएम संसद ने कहा, भारत में लोग न केवल ओउम और ‘गाय’ सुनते हैं, बल्कि मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारा में होने वाले पाठ और गिरजाघरों की घंटी की आवाज भी सुनते हैं.

ओवैसी ने कहा, लोग जब गाय के नाम पर मारे जा रहे हैं तो आपको चिंतित होना चाहिए. प्रधानमंत्री को चिंतित होना चाहिए कि संविधान का घोर उल्लंघन हो रहा है. हम अपने प्रधानमंत्री से उम्मीद करते हैं कि जब तबरेज, पहलु खान या अखलाक मारे जा रहे हैं तो उन्हें यह सोचकर चिंतित होना चाहिए कि मेरे देश में क्या चल रहा है.

गाय हमारे हिंदू भाइयों के लिए पवित्र जान है, लेकिन संविधान में जीवन और समानता का अधिकार मनष्‍यों को दिया गया. मुझे उम्‍मीद है कि पीएम इसे ध्‍यान में रखेंगे.

बता दें कि पीएम ने कहा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन बहुत मूल्यवान है. कोई कल्पना करे कि पशुधन के बिना अर्थव्यवस्था चल सकती है क्या ? गांव चल सकता है क्या ? गांव का परिवार चल सकता है क्या ? लेकिन पता नही ‘ओम’ शब्द सुनते ही करंट लग जाता है कुछ लोगो को.’

 

दक्षिण अफ्रीका के रबांडा का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह वहां गए थे और वहां गांवों में लोगों को गाय भेंट में दी जाती है. गांव में गाय, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन अर्थव्यवस्था का आधार बने हैं. भेंट की गई गाय की पहली बछिया को सरकार लेती हैं और उन्हें सौंपती हैं जिनके पास गाय नहीं है. इस तरह पूरी श्रृंखला चलती रहती है और गाय लोगों की आय का एक हिस्सा बनती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने मथुरा में राष्ट्रीय पशु रोग उन्मूलन कार्यक्रम की शुरूआत की. पशुओं में खुरपका-मुंहपका रोग को दूर करने और टीकाकरण की व्यवस्था कर, स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण किया.

पीएम मोदी ने कहा कि ब्रज भूमि ने हमेशा से ही पूरे देश, पूरे विश्व और पूरी मानवता को प्रेरित किया है. आज पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण के लिए रोल मॉडल ढूंढ रहा है. लेकिन भारत के पास भगवान श्रीकृष्ण जैसा प्रेरणा स्रोत हमेशा से रहा है,
जिनकी कल्पना ही पर्यावरण प्रेम के बिना अधूरी है.

प्रधानमंत्री ने कहा, पर्यावरण और पशुधन हमेशा से भारत के आर्थिक चिंतन का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. यही कारण है कि चाहे स्वच्छ भारत हो, जल जीवन मिशन हो या कृषि और पशुपालन को प्रोत्साहन. प्रकृति और आर्थिक विकास में संतुलन बनाकर ही हम सशक्त और नए भारत के निर्माण की तरफ आगे बढ़ रहे हैं.