राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के मुस्लिम वाले बयान पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने हमला बोला है. भागवत ने अपने बयान में कहा था कि भारतीय मुस्लिम दुनिया में सबसे ज्यादा संतुष्ट हैं. भागवत के इसे बयान पर हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने ट्वीट कर निशाना साधा है.Also Read - UP: RSS नेता के बेटे की सुसाइड केस में सब-इंस्‍पेक्‍टर समेत 5 पुलिसकर्मी सस्‍पेंड

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AIMIM प्रमुख ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘हमारी खुशी का पैमाना क्या है? भागवत नाम का एक आदमी लगातार हमें बता सकता है कि हमें बहुमत के प्रति कितना आभारी होना चाहिए? हमारी खुशी का मापक यह है कि क्या संविधान के तहत हमारी गरिमा का सम्मान किया जाता है. हमें यह मत बताइए कि आपकी विचारधारा चाहते समय हम कितने ‘खुश’ हैं.’ Also Read - CAA और NRC को लेकर RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान- देश के मुसलमानों को दिया यह भरोसा

एक अन्य ट्वीट में ओवैसी ने कहा, ‘मुसलमानों को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाने के लिए मैं आपको यह नहीं सुनना चाहता कि हम अपनी मातृभूमि में रहने के लिए बहुमत के आभारी हैं.’

सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा था कि भारतीय मुसलमान दुनिया में सबसे ज्यादा संतुष्ट हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जब भारतीयता की बात आती है तो सभी धर्मों के लोग एक साथ खड़े होते हैं. भागवत ने कहा था कि किसी तरह की कट्टरता और अलगाववाद केवल वे ही लोग फैलाते हैं जिनके खुद के हित प्रभावित होते हैं.

मुगल शासक अकबर के खिलाफ युद्ध में मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप की सेना में बड़ी संख्या में मुस्लिम सैनिकों के होने का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भारत के इतिहास में जब भी देश की संस्कृति पर हमला हुआ है तो सभी धर्मों के लोग साथ मिलकर खड़े हुए हैं. संघ प्रमुख ने महाराष्ट्र से प्रकाशित होने वाली हिंदी पत्रिका ‘विवेक’ को दिये इंटरव्यू में कहा, ‘सबसे ज्यादा भारत के ही मुस्लिम संतुष्ट हैं.’ उन्होंने कहा कि क्या दुनिया में एक भी उदाहरण ऐसा है जहां किसी देश की जनता पर शासन करने वाला कोई विदेशी धर्म अब भी अस्तित्व में हो.

भागवत ने कहा, ‘हमारे संविधान में यह नहीं कहा गया कि यहां केवल हिंदू रह सकते हैं या यह कहा गया हो कि यहां केवल हिंदुओं की बात सुनी जाएगी, या अगर आपको यहां रहना है तो आपको हिंदुओं की प्रधानता स्वीकार करनी होगी. हमने उनके लिए जगह बनाई. यह हमारे राष्ट्र का स्वभाव है और यह अंतर्निहित स्वभाव ही हिंदू कहलाता है.’ संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि कौन किसकी पूजा करता है. धर्म जोड़ने वाला, उत्थान करने वाला और सभी को एक सूत्र में पिरोने वाला होना चाहिए.

(इनपुट: एजेंसी)