
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Narayan Sai Divorce News: मध्य प्रदेश के इंदौर की एक फैमिली कोर्ट ने हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल वैवाहिक विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के बेटे नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी हरपालानी के बीच लगभग आठ वर्षों से चल रही कानूनी जंग का अंत करते हुए उनके विवाह को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया है.
यह फैसला न केवल दोनों पक्षों के लिए व्यक्तिगत महत्व रखता है, बल्कि इसमें तय की गई एलीमनी यानी गुजारा भत्ता की राशि ने भी सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है.
अदालत ने अपने आदेश में नारायण साईं को निर्देश दिया है कि वह अपनी पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में 2 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि का भुगतान करे. गौरतलब है कि नारायण साईं वर्तमान में सूरत की जेल में बंद है, जहां वह दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है. जेल में होने के बावजूद, कानूनन वह अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए उत्तरदायी माना गया है.
यह मामला कोई नया नहीं था. जानकी और नारायण साईं के बीच का यह विवाद पिछले आठ वर्षों से अदालत की दहलीज पर लंबित था. लंबी कानूनी कार्यवाही, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, अदालत ने इस महीने की शुरुआत में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था.
जानकी के वकील अनुराग गोयल के अनुसार, सभी कानूनी पहलुओं को परखने के बाद अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि अब इस विवाह को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है.
याचिका में साझा की गई जानकारी के अनुसार, नारायण साईं और जानकी का विवाह वर्ष 2008 में हुआ था. हालांकि, यह वैवाहिक संबंध अधिक समय तक सुखद नहीं रह सका. वर्ष 2013 में जब नारायण साईं पर आपराधिक मामले दर्ज हुए और उनकी गिरफ्तारी हुई, तभी से दोनों अलग-अलग रह रहे थे. जानकी ने अदालत के समक्ष अपनी व्यथा साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे.
जानकी ने आरोप लगाया कि उन्हें ससुराल में उपेक्षा का सामना करना पड़ा. वर्तमान में वह अपनी मां के साथ इंदौर में रह रही हैं. याचिका में नारायण साईं के अन्य महिलाओं के साथ संबंधों का भी जिक्र किया गया, जिसे मानसिक क्रूरता का आधार बनाया गया. पति का दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में दोषी पाया जाना और जेल जाना भी तलाक के प्रमुख कारणों में से एक रहा.
जानकी हरपालानी ने भविष्य की सुरक्षा और अपनी जरूरतों को देखते हुए 5 करोड़ रुपये के गुजारा भत्ते की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने नारायण साईं की आर्थिक स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद इसे 2 करोड़ रुपये तय किया.
विवाद का एक और पहलू बकाया राशि से जुड़ा है. वकील अनुराग गोयल ने बताया कि अदालत ने पहले अंतरिम भरण-पोषण के रूप में 50 हजार रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया था. नारायण साईं की ओर से इस राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते अब तक लगभग 50 लाख रुपये बकाया हो चुके हैं. अब बचाव पक्ष इस बकाया राशि की वसूली के लिए भी कानूनी प्रक्रिया तेज करने की तैयारी में है.
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं होगा. सूत्रों के अनुसार, नारायण साईं की टीम इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर रही है. इसके अतिरिक्त, नारायण साईं की संपत्तियों के सत्यापन और उनके मूल्यांकन को लेकर भी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.
जानकी पक्ष का आरोप है कि संपत्तियों की पूरी जानकारी छिपाई गई है, जिसके कारण भविष्य में कुर्की या वसूली की प्रक्रिया के दौरान विवाद और गहरा सकता है.
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