
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
भारतीय संगीत जगत की मशहूर आवाज, महान पार्श्व गायिका आशा भोंसले का रविवार (12 अप्रैल 2026) को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके जाने के साथ ही संगीत के उस गौरवशाली अध्याय का अंत हो गया है जिसने सात दशकों से अधिक समय तक न केवल भारतीय फिल्मों को, बल्कि देश की पूरी सांस्कृतिक चेतना को अपनी सुरीली आवाज से सराबोर रखा.
आशा ताई को उनकी असाधारण बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता था. चाहे वह चंचल फिल्मी गाने हों, रूहानी गजलें हों या आधुनिक पॉप संगीत, उन्होंने हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी. लेकिन उनकी विरासत केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी. भारतीय विज्ञापन जगत के शुरुआती दौर, विशेषकर रेडियो और टेलीविजन के गोल्डन एरा में उनकी आवाज ने विज्ञापनों को एक नई पहचान दी थी.
जिस समय भारतीय ब्रांड अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, आशा भोंसले उन चुनिंदा दिग्गज गायकों में से थीं जिन्होंने विज्ञापनों के लिए अपनी आवाज दी. उन्होंने विज्ञापन के साधारण संदेशों को अपनी आवाज से यादगार संगीत में बदल दिया.
हिमालय बुके- हिंदुस्तान लीवर के इस साबुन और पाउडर के विज्ञापन के लिए उन्होंने “फूल के समान है” जिंगल गाया था. जां निसार अख्तर द्वारा लिखे गए और संगीतकार रवि द्वारा तैयार किए गए इस गीत ने उत्पाद की कोमलता और खुशबू को घर-घर तक पहुंचा दिया.
रसना- साल 2002 में उन्होंने रसना के लिए “रसीला रोजाना उत्सव” जिंगल गाया. इस विज्ञापन ने न केवल पुरानी यादें ताजा कीं, बल्कि नई पीढ़ी के साथ भी एक गहरा जुड़ाव बनाया.
जानकारों का मानना है कि 1970 से 2000 के दशक के बीच भारतीय विज्ञापन जगत पूरी तरह से फिल्म संगीत से प्रभावित था. आशा जी की यह खूबी थी कि वे बहुत कम समय (30-60 सेकंड) में भी ब्रांड की कहानी को अपनी आवाज के जरिए लोगों के दिलों तक पहुंचा देती थीं.
आशा भोंसले का योगदान अतुलनीय है. उन्होंने हजारों गानों को अपनी आवाज दी और दुनिया भर में भारतीय संगीत का मान बढ़ाया. उनके नाम पुरस्कारों की एक लंबी सूची है. उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समेत कई अवॉर्ड से नवाजा गया था.
आशा जी की ख्याति केवल भारत तक सीमित नहीं थी. उस्ताद अली अकबर खान के साथ उनके एल्बम ‘लिगेसी’ को ग्रैमी पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया था. ब्रिटेन, अमेरिका और मध्य पूर्व देशों में उनके संगीत कार्यक्रमों ने भारतीय प्रवासियों के बीच उन्हें एक ‘ग्लोबल आइकॉन’ बना दिया था.
आशा भोंसले का निधन भारतीय संगीत और विज्ञापन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उन्होंने न केवल प्लैबेक सिंगिंग की परिभाषा बदली, बल्कि यह भी दिखाया कि एक कलाकार अपनी आवाज से समाज के हर पहलू को कैसे प्रभावित कर सकता है. उनकी आवाज आने वाली कई पीढ़ियों तक गूंजती रहेगी, जो हमें उनकी सादगी, समर्पण और सुरीले सफर की याद दिलाती रहेगी.
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