अमरावती (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के गुंटुर जिले के एक सरकारी अस्पताल में एक आशा कार्यकर्ता (Asha Worker) की मौत हो गई. आशा के सहकर्मियों ने आरोप लगाया है कि कोविड-19 का टीका लगाये जाने के बाद उसकी मौत हुई. आशा वर्कर को टीका लगने के बाद सिर में दर्द हुआ, बुखार आया. उसे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई. गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (GGS) में आशा कार्यकर्ता की मौत हो जाने के बाद अन्य आशा कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन किया और पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की. Also Read - वैक्सीन लगवाई फिर भी MBBS स्टूडेंट की कोरोना संक्रमण से मौत, 10 छात्र चपेट में, बिहार के मेडिकल कॉलेज में हड़कंप

कोरोना वायरस (Corona Virus) का टीका लगवाने के तीन दिन बाद 22 जनवरी को 44 वर्षीय आशा कार्यकर्ता ने सिर में दर्द और बुखार की शिकायत की थी. आशा कार्यकर्ता के भाई ने बताया, ‘‘हम पहले उसे निजी अस्पताल लेकर गए, लेकिन उसका स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने पर सरकारी अस्पताल ले आए. वह तंदुरूस्त महिला थी और उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान बिना थके लगातार काम किया था.’’ उन्होंने आशा कार्यकर्ता को ब्रेन हेमरेज होने से भी इनकार किया, जैसा कि अस्पताल के डॉक्टरों ने दावा किया था. Also Read - पूर्व क्रिकेटर कपिल देव ने लगवाई कोरोना वैक्सीन, दिल्ली के फोर्टिस हॉस्पिटल में ली पहली डोज़

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के एक नेता के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया और जब जिलाधिकारी मृतका के परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने अस्पताल पहुंचे, तो उनके साथ बहस होते भी देखने को मिला. जिलाधिकारी ने कहा कि वह राज्य सरकार को कोविड-19 के अग्रिम मोर्चे की कार्यकर्ता की मौत होने पर दिए जाने वाले मुआवजे की तर्ज पर मृतका (Asha Worker) के परिवार को मुआवजा देने के लिए प्रस्ताव भेजेंगे. उन्होंने परिवार के सदस्य को नौकरी देने के अलावा मकान के लिए भूखंड देने का भी वादा किया. Also Read - Corona Virus Latest Update News: महाराष्ट्र में पॉजिटिविटी रेट सबसे ज्यादा, पंजाब में बढ़ा Death Rate

वहीं, जिला प्रशासन इस बात को नकार रहा है. गुंटुर जिले के जिलाधिकारी सैम्युअल आनंद ने कहा कि आशा कार्यकर्ता (Asha Worker) की मौत की वास्तविक वजह की जानकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएगी. साथ ही, उन्होंने कहा कि गत आठ दिनों में 10,099 स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण किया गया है, जिनमें प्रतिकूल प्रभाव का एक भी मामला सामने नहीं आया है.