जयपुरः राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कैबिनेट विस्तार के बाद सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. वे अपनी कैबिनेट में राज्य के वरिष्ठ नेताओं को जगह देने में असफल रहे हैं. इस कारण कई वरिष्ठ नेताओं ने नाराजगी में शपथ ग्रहण समारोह तक का बहिष्कार किया. पार्टी के वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, हेमराम चौधरी, राजेंद्र पारीख और भरत सिंह कुन्नार, विधानसभा के पूर्व स्पीकर दीपेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान हाउसिंग के पूर्व चेयरमैन परासराम मोर्डिया कुछ ऐसे नेता हैं जो जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से मंत्री पद के दावेदार थे. ये सभी अनुभवी नेता हैं और इन्होंने अशोक गहलोत के दूसरे कार्यकाल (2008 से 2013) के दौरान उनके साथ काम किया था.

हमारे सहयोगी अखबार डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जा रहा था कि अशोक गहलोत के सीएम बनने के बाद पुरानी टीम के अधिकतर नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी, लेकिन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ ‘पावर शेयरिंग’ ने इनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. सोमवार को जिन 23 विधायकों को मंत्री बनाया गया उनमें से 18 पहली बार मंत्री बने हैं. कुल मिलाकर सीएम गहलोत और सचिन पायलट के गुट को मंत्रिमंडल में बराबर-बराबर की हिस्सेदारी मिली है.

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सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में अपनी कोर टीम को शामिल करना चाहते थे लेकिन सचिन पायलट ज्यादा से ज्यादा युवा चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह देने के पक्ष में थे. ताकि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता में एक संदेश दिया जा सके. वैसे कहा जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी पार्टी को भारी पड़ सकती है. सीपी जोशी, हेमराम चौधरी, मालवीय, पारीख, मोर्डिया, दीपेंद्र सिंह और भरत सिंह सोमवार के शपथ ग्रहण समारोह से नदारत थे. इसके संकेत साफ हैं. उनके समर्थक भी सोशल मीडिया पर पार्टी के फैसले की मुखालफत करते नजर आए.

स्पीकर बनाए जा सकते हैं सीपी जोशी
पार्टी सूत्रों का दावा है कि इन बड़े नेताओं को अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए रिजर्व रखा गया है. इन्हें लोकसभा का टिकट दिया जा सकता है. पार्टी मिशन-25 पर काम कर रही है. यानी राजस्थान में लोकसभा की सभी 25 में से 25 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है. यहां तक कि सीएम गहलोत ने दावा किया था कि पार्टी लोकसभा की 20 सीटें जीत सकती है. लेकिन अगर पार्टी के ये करीब आधा दर्जन सीनियर नेता लोकसभा चुनाव लड़ते हैं और जीत भी जाते हैं तो ऐसी स्थिति में विधानसभा में पार्टी बहुमत से पीछे हो जाएगी. 200 सदस्यीय विधानसभा में उसके 99 विधायक हैं.

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ऐसी रिपोर्ट है कि पार्टी कुछ बड़े नेताओं को एडजस्ट करने की योजना बना रही है. वरिष्ठ नेता सीपी जोशी, जो 2008 में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है. भरत सिहं को भी स्पीकर या डिप्टी स्पीकर बनाया जा सकता है. सीपी जोशी 2008 में केवल एक वोट से विधानसभा चुनाव हार गए थे और सीएम बनने से चूक गए थे. दीपेंद्र सिंह शेखावत अशोक गहलोत सरकार में विधानसभा स्पीकर थे, लेकिन उनके इस बार जगह नहीं मिली है.