नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विश्व धरोहर ताज महल के संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने में विफल रहने को लेकर बुधवार को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आड़े हाथ लिया. न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कीटों से ताजमहल के प्रभावित होने पर चिंता व्यक्त की और प्राधिकारियों से जानना चाहा कि इसकी रोकथाम के लिये क्या कदम उठाए गए हैं. ASI ने काई और गंदी जुराबों को ताजमहल के बदरंग होने के लिए जिम्मेदार ठहराया. ASI ने कहा कि लोग जो जुराब पहनकर आते हैं वो भी कई बार गंदी होती हैं कि फर्श खराब होते हैं. ASG तुषार ने कहा कि विदेशों में कई जगहों पर डिस्पाजेबल जुराबें दी जाती हैं. याचिकाकर्ता वहीं एमसी मेहता ने कहा कि यमुना में पानी गंदा है. पहले मछलियां होती थी जो काई को खाती थीं. सरकार बैराज बना रही हैं जिसके कारण यमुना में पानी कम है.

गंदे कीड़े और काई भी वजह
ASI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ताजमहल के बदलते रंग की वजह गंदे जुराब और ताज पर मौजूद गंदे कीड़े और काई है. कोर्ट ने ASI के इस जवाब पर हैरानी जताते हुए कहा कि ‘क्या ये संभव है कि कि काई उड़कर छत पर पहुंच गई. कोर्ट ने ASI के लचर रवैये पर ASI को फटकार भी लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समस्या ये है कि ASI ये मानने के लिए तैयार ही नहीं कि कोई दिक्कत है. अगर ASI ने जिम्मेदारी से अपना काम किया होता तो ये स्थिति पैदा ही नहीं होती. 22 साल पहले, 1996 में दिए हमारे आदेश पर अब तक अमल नहीं हो पाया है.

यमुना के कीटों से समस्या
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वकील ने कोर्ट से कहा कि यमुना नदी में पानी के ठहराव की वजह से कीटों की समस्या उत्पन्न हो रही है. केन्द्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से पीठ ने कहा , ‘ यदि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपना काम ठीक से किया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती. हम एएसआई के अपना बचाव करने के तरीके से आश्चर्यचकित हैं. आप ( केन्द्र ) कृपया विचार कीजिये कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की वहां जरूरत है या नहीं.

तो नियुक्त होंगे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ
इस बीच, नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ताज महल के संरक्षण के लिये अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को नियुक्त करने के शीर्ष अदालत के सुझाव पर विचार कर रहा है. शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में ताज महल के संरक्षण और ताज ट्रैपेजियम जोन में पर्यावरण के संरक्षण के बारे में दृष्टि पत्र का मसौदा पेश करने का निर्देश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया था. ताज ट्रैपेजियम जोन करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है जिसके दायरे में आगरा , फिरोजाबाद , मथुरा , हाथरस , एटा और राजस्थान के भरतपुर का इलाका आता है.