गुवाहाटी. राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National register for Citizenship) यानी एनआरसी के प्रकाशन में अब जबकि महज चार दिन रह गए हैं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की असम इकाई को आशंका है कि एनआरसी की प्रक्रिया सही तरीके से संचालित नहीं हो रही है. इस कारण कहीं बड़ी संख्या में देशवासियों के नाम इसमें शामिल होने से छूट सकते हैं. यही नहीं, भाजपा को यह भी डर सता रहा है कि कहीं अवैध विदेशियों के नाम एनआरसी में शामिल न हो जाएं. असम भाजपा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने सोमवार को कहा कि एनआरसी के त्रुटि रहित होने की संभावना नहीं है. आपको बता दें कि एनआरसी 31 अगस्त को प्रकाशित होने वाला है.

क्या है NRC, जिसके जारी होते ही 40 लाख लोगों की नागरिकता पर उठा सवाल, असम से दिल्ली तक बवाल

उन्होंने कहा कि कुछ अवैध विदेशियों के नाम शामिल हो सकते हैं, जबकि वैध नागरिकों के नाम गायब हो सकते हैं. रंजीत कुमार दास ने कहा कि एनआरसी को जिस तरीके से अपडेट किया गया है, सत्ताधारी पार्टी उससे खुश नहीं है. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि एनआरसी त्रुटिरहित दस्तावेज होगा.” दास का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि कुछ ही दिन पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने एनआरसी के सफलतापूर्वक प्रकाशन का दावा किया है. सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने पिछले सप्ताह स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में कहा था, “एनआरसी एक ऐतिहासिक दस्तावेज होगा, जिसमें न तो अवैध विदेशियों के नाम शामिल होंगे, और न किसी भी सही भारतीय नागरिक का नाम छूटेगा.”

राज्य भाजपा अध्यक्ष ने एनआरसी के समन्वयक प्रतीक हजेला की भी आलोचना की और कहा कि वह अपने सनक के अनुसार काम कर रहे हैं और इसका परिणाम एनआरसी में गलतियों के रूप में सामने आएगा. रंजीत कुमार दास ने उदाहरण देते हुए कहा कि असम आंदोलन के शहीदों के परिवारों के नाम एनआरसी से बाहर कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा, “एनआरसी प्रशासन ने एनआरसी अपडेशन कार्य में कई संदिग्ध विदेशियों के नाम शामिल कर दिए हैं. हमें पता चला है कि लोगों ने एनआरसी में अपने नाम शामिल करने के लिए जो दस्तावेज सौंपे थे, उनका कोई काउंटर वेरिफिकेशन नहीं किया गया है.”

Q&A: NRC को लेकर उठे 10 सवाल का जवाब, असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस क्यों है खास

दास का बयान मायने रखता है, क्योंकि राज्य 1951 के एनआरसी को अपडेट करने के लिए 2013 से ही कोशिश कर रहा है और इस पर 1,200 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुका है. इस पूरी प्रक्रिया में 55,000 से अधिक सरकारी कर्मचारी लगे हुए थे. दास ने कहा कि यदि किसी भी सही भारतीय नागरिक का नाम एनआरसी से छूटता है तो पार्टी विधानसभा और संसद के जरिए एक कानून और संशोधन की मांग करेगी. भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ही आम लोगों से अपील की कि वे कोई अफवाह न फैलाएं और यदि किसी का नाम एनआरसी में छूट जाता है तो उसके लिए विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण से संपर्क करें.