नई दिल्ली: असम में एनआरसी (National Register of Citizen/राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की फाइनल सूची जारी कर दी गई है. इस सूची में राज्य के 3.11 करोड़ लोगों के नाम शामिल हैं, जबकि 19 लाख से अधिक लोग इससे बाहर हो गए हैं. सूची जारी किए जाने के बाद राज्य में धारा 144 लागू कर दी गई है. इस बात की आशंका है कि सूची जारी होने के बाद राज्य में क़ानून व्यवस्था के हालात बिगड़ सकते हैं. एनआरसी कार्यालय ने बताया कि इस अंतिम सूची से 19,06,677 लोग निकाले गए हैं. सूची में 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया है.

शामिल किए गए और बाहर किए गए नामों को लोग एनआरसी की वेबसाइट www.nrcassam.nic.in पर देख सकते हैं. बयान में कहा गया कि सुबह 10 बजे अंतिम सूची प्रकाशित की गई. शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाजी घंटों के दौरान देख सकते हैं. सूची में अपना नाम चेक करने के लिए एनआरसी सेवा केंद्रों पर लोगों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं. यहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. किसी बवाल की आशंका को देखते हुए धारा 144 लगाई गई है. असम में बीजेपी की सरकार है. एनआरसी को लेकर कई दलों के नेताओं ने सवाल उठाए थे. इन नेताओं का कहना था कि एनआरसी में अपने ही देश के कई लोगों के नाम छूट सकते हैं, इसलिए इस पर एहतियात बरतनी चाहिए.

असम: NRC की अंतिम सूची जारी, लगभग 19 लाख लोग सूची से बाहर, राज्य में धारा 144 लागू

आइए जानते हैं नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस आखिर क्या है. इसे लेकर उठने वाले सवालों के जवाब…

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स क्या है?
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स किसी राज्य में रह रहे लोगों का एक वैध रिकॉर्ड है. साल 1951 में पहली बार इसे तैयार किया गया था. इसका उद्देश्य नागरिकों की गणना करना और उनके घरों के साथ-साथ अचल संपत्तियों का ब्यौरा रखना था. उदाहण के तौर पर नाम, उम्र, पिता का नाम, पति का नाम, क्षेत्र, घर और अन्य जरूरी चीजें. यह पूरा डेटा साल 1951 की जनगणना के मुताबिक तैयार हुआ.

असम में एनआरसी को अपडेट करने की क्यों जरूरत पड़ी?
साल 1951 में एनआरसी के डेटा के बाद असम में लोगों के आने वाले की संख्या तेजी से बढ़ रही थी. बताया जा रहा कि साल 1971 में जब तक बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग नहीं हो गया तब तक पूर्वी पाकिस्तान से भारी मात्रा में लोग असम की सीमा में प्रवेश किए. साल 1972 में बांग्लादेश की आजादी के बाद भी यह संख्या बढ़ती रही. ऐसे में वहां वर्षों से रह रहे लोगों और घुसपैठ करके आए लोगों में विवाद शुरू हो गया. विवाद बढ़ता देख असम के छात्र सक्रिय हो गए और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन नाम से एक संगठन बनाकर इस घुसपैठ को रोकने के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया.

घुसपैठ को रोकने कि लिए कहां पहुंचे स्टूडेंट्स?
ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने अपने राज्य स्तर पर तकरीबन 8 साल तक काफी प्रदर्शन किया. लेकिन वहां उन्हें घुसपैठ को रोकने में कामयाबी नहीं मिल रही थी. ऐेसे में छात्रों का एक समूह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक पहुंचा और मामले में संज्ञान लेने के लिए कहा. इंदिरा गांधी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और साल 1983 में असम के लिए संसद में ‘अवैध प्रवासी ऐक्ट’ पारित हुआ.

असम का नागरिक कौन?
आसाम में घुसपैठ पर प्रदर्शन के बाद साल 1985 में भारत सरकार, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के बीच समझौता हुआ. इसके अनुसार सिटिजनशिप एक्ट 1955 में संसोधन हुआ. इसके मुताबिक, भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति, जिसमें 1 जनवरी 1966 तक बांग्लादेश से भारत में आए लोगों को नागरिक माना गया. वहीं, 1 जनवरी 1966 से लेकर 25 मार्च 1971 के बीच आए लोग रजिस्टर कराकर नागरिकता हासिल कर सकते थे.

किस तरह से एनआरसी अपडेट हुआ?
लोगों को अपने विरासत (वंशज) कोड के साथ एक फॉर्म सबमिट करना था. इसमें एक पीएनआर टाइप का यूनिक कोड है, जो कि उनके खानदान या परिवार को लिंक करता है. इस विरासत डॉक्यूमेंट में 25 मार्च 1971 तक के चुनावी डेटा और 1951 एनआरसी के डेटा भी शामिल हैं. विरासत डॉक्यूमेंट के अलावा भी 12 तरह के दूसरे डॉक्यूमेंट जमा कराए गए.

अपना नाम NRC में चेक कैसे करें?
इसके लिए एनआरसी के सेवा केंद्र में जाने के साथ-साथ एनआरसी की वेबसाइट पर भी देखा जा सकता है. इतना ही नहीं आप एसएमएस भी करके इसकी जानकारी ले सकते हैं. इसके लिए 24*7 टोल फ्री नंबर 15107 पर असम से कॉल कर सकते हैं. वहीं, असम के बाहर रहने वाले लोग 18003453762 पर कॉल करके जानकारी ले सकते हैं. इसके लिए 21 डिजिट का अप्लिकेशन रिसिप्ट नंबर (ARN) देना होगा. नामों को लोग एनआरसी की वेबसाइट www.nrcassam.nic.in पर भी देख सकते हैं.

ARN नंबर गुम होने पर क्या करें?
यदि किसी का एआरएन नंबर गुम हो गया है तो वह सीधे टोल फ्री नंबर 15107 पर कॉल कर सकता है. इस दौरान उसे परिवार के मुखिया का नाम और रजिस्ट्रेशन के समय दिया गया मोबाइल नंबर रखना होगा.

क्या डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन पर्याप्त है?
असम के मूल निवासी होने के लिए बिना किसी सख्ती के वैरिफिकेशन किया गया. अधिकारियों में मुताबिक, अगर दिए गए डॉक्यूमेंट में किसी तरह का अंतर पाया जाता है, तो उसे दूसरे तरह से भी पुष्ट किया गया.

असम के भाजपा नेता को आशंका- NRC में कई गलतियां, छूट सकते हैं कई देशवासियों के नाम