नई दिल्ली: भारत सरकार ने असम में एनआरसी की फाइनल सूची जारी कर दी है. सूची में 3 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हैं, जबकि 19 लाख से अधिक लोग बाहर कर दिए हैं. बाहर किए गए लोगों द्वारा किसी बवाल की आशंका को देखते हुए राज्य में धारा 144 लगा दी गई है. सवाल है कि इस सूची से बाहर किए गए लोगों के सामने क्या विकल्प है? क्या उन्हें विदेशी घोषित किया जाएगा? क्या उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया जाएगा, जो दशकों से असम में रह रहे हैं? क्या हिरासत में लेने के बाद ऐसे लोगों को जेल भेजा जाएगा? अब क्या विकल्प है उन लोगों के सामने जिनके नाम सूची में नहीं हैं. आइये जानते हैं…

सुबह 10 बजे अंतिम सूची प्रकाशित की गई. शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाज के घंटों के दौरान देख सकते हैं. इस सूची में 19 लाख से अधिक लोगों के नाम नहीं हैं. इन लोगों के सामने एक विकल्प ये है कि सूची से असंतुष्ट लोग 120 दिन के भीतर विदेशी न्यायाधिकरण या सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.

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असम सरकार ने पहले कहा था जिन लोगों को एनआरसी सूची में शामिल नहीं किया गया उन्हें किसी भी स्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा. हां, ऐसा तब हो सकता है जब इन्हें विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) विदेशी घोषित कर देगा. ये लोग विदेशी न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं. इसके लिए 120 दिन का समय है. अगर विदेशी न्यायाधिकरण से भी संतुष्टि नहीं मिलती है तो फिर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी जाया जा सकता है.

अगर इन सब विकल्पों को आजमाने के बाद भी केस हारकर विदेशी घोषित होता है तो फिर उसे डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा. ऐसे लोगों को देश से बाहर किया जाएगा या नहीं, ये अभी स्पष्ट नहीं है. हालांकि सरकार पहले ही कह चुकी है जिनके नाम इस सूची में नहीं हैं उन्हें फिलहाल अरेस्ट नहीं किया जाएगा.

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करीब 20वीं सदी की शुरुआत से ही बांग्लादेश से अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहा असम अकेला राज्य है जहां पहली बार 1951 में राष्ट्रीय नागरिक पंजी तैयार किया गया था. तब से ऐसा पहली बार है जब एनआरसी का अद्यतन किया गया है.