तेजपुर: असम के सोनितपुर जिले में एक महिला ने उन अफवाहों के बाद आत्महत्या कर ली कि उसका नाम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की शनिवार को जारी की गई अंतिम सूची में नहीं है. उसके परिवार के सदस्यों ने यह दावा किया. बहरहाल, जिला प्रशासन ने इससे इनकार किया कि यह घटना एनआरसी के प्रकाशन से जुड़ी है. महिला के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि सोनितपुर के दुलाबाड़ी इलाके की रहने वाली सायरा बेगम (42) ने एनआरसी में अपना नाम ना होने की खबर सुनने के बाद कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली.

बता दें कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी का अंतिम प्रकाशन शनिवार को हुआ, जिसमें 19 लाख छह हजार 657 लोग इसमें जगह बनाने से वंचित रह गए. 3,30,27,661 आवेदकों में से कुल 3,11,21,004 लोगों का नाम इसमें शामिल किया गया है.

पुलिस ने बताया कि महिला के परिवार ने उन्हें घटना के बारे में सूचना नहीं दी और अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. डीएसपी मुख्यालय तेजपुर रश्मि रेखा सरमा ने बताया कि स्थानीय लोगों के मुताबिक महिला की मानसिक हालत ठीक नहीं थी.

हालांकि, महिला के पति शमशेर अली ने मीडियाकर्मियों को बताया कि उसका और उसके दो बेटों का नाम एनआरसी की अंतिम सूची में नहीं है. बेगम का नाम 2017 तथा 2018 में प्रकाशित एनआरसी के मसौदे में था.

बीते शनिवार को असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अपडेट अंतिम सूची शनिवार को जारी कर दी गई. एनआरसी में 19 लाख से अधिक आवेदक अपना स्थान बनाने में विफल रहे. सूची से बाहर रखे गए इन आवेदकों का भविष्य अधर में लटक गया है, क्योंकि एनआरसी असम में वैध भारतीय नागरिकों की पुष्टि से संबंधित है.

एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 3,30,27,661 लोगों ने एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था. इनमे से 3,11,21,004 लोगों को दस्तावेजों के आधार पर एनआरसी में शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है.

लिस्‍ट में नहीं नाम तो यह करें
जारी सूची में जिन लोगों के नाम एनआरसी से बाहर रखे गए हैं. वे इसके खिलाफ 120 दिन के भीतर विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) में अपील दर्ज करा सकते हैं. यदि वे न्यायाधिकरण के फैसलों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का रूख कर सकते है.

एएफटी के द्वारा विदेशी घोषित किए जाने तक नहीं होगी गिरफ्तारी
असम सरकार पहले ही कह चुकी है, जिन लोगों को एनआरसी सूची में शामिल नहीं किया गया उन्हें किसी भी स्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा, जब तक एफटी उन्हें विदेशी ना घोषित कर दे.

यहां जाकर लोग सूची देख सकते हैं
शनिवार को सुबह 10 बजे अंतिम सूची प्रकाशित की गई. शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाज के घंटों के दौरान देख सकते हैं.

बीजेपी की मंत्री ने दी ये सलाह
– असम सरकार में भाजपा के वरिष्ठ मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए कई शरणार्थियों को एनआरसी सूची से बाहर निकाला गया. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को सीमावर्ती जिलों में कम से कम 20 प्रतिशत और शेष असम में 10 प्रतिशत के पुन: सत्यापन की अनुमति देनी चाहिए. सरमा ने कहा कि जैसा कि कई लोगों ने आरोप लगाया है, विरासत संबंधी आंकड़ों से छेड़छाड़ की गई.

पूर्व सीएम ने लगाए ये आरोप
असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने आरोप लगाया कि केन्द्र त्रुटिरहित एनआरसी लाने के लिए अपने कर्तव्य को निभाने में विफल रही है और असम के लोग असहाय महसूस कर रहे है. उन्होंने कहा, जिस तरह से एनआरसी को लापरवाही से तैयार किया गया है, अवैध अप्रवासियों को सूची में शामिल किया गया है और वास्तविक भारतीयों को बाहर रखा गया है. यह भारत सरकार की जिम्मेदारी है. हम असहाय महसूस करते हैं.

सरकार ने दिया ये आश्‍वासन
असम सरकार ने शनिवार को दावा किया कि कई वास्तविक भारतीय एनआरसी की अंतिम सूची से छूट गये है लेकिन उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनके पास एफटी में अपील करने का विकल्प उपलब्ध है. असम के संसदीय कार्य मंत्री चन्द्रमोहन पटवारी ने कहा कि सरकार एनआरसी सूची में स्थान नहीं पाने वाले भारतीय नागरिकों को कानूनी मदद उपलब्ध कराएगी.

कई वास्तविक भारतीय एनआरसी में छूट गए
पटवारी ने कहा, एक बात निश्चित है कि कई वास्तविक भारतीय एनआरसी में छूट गये है. हालांकि उन्हें घबराने और चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. वे एफटी में अपील कर सकते हैं. उन्होंने कहा, एनआरसी में स्थान नहीं पाने वास्तविक भारतीयों को यदि न्यायाधिकरण में अपील करने में मदद की जरूरत होगी तो सरकार उनकी मदद करने के लिए तैयार है.

आसू सुप्रीम कोर्ट जाएगा
बारपेटा से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालीक ने कहा कि वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है . उन्होंने कहा, काफी संख्या में वैध नामों को हटा दिया गया है. ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) शनिवार को जारी अंतिम एनआरसी से बाहर रखे गए नामों के आंकड़े से खुश नहीं है और इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेगा. आसू के महासचिव लुरिनज्योति गोगोई ने कहा, हम इससे बिल्कुल खुश नहीं हैं. ऐसा लगता है कि अद्यतन प्रक्रिया में कुछ खामियां हैं. हम मानते हैं कि एनआरसी अपूर्ण है. हम एनआरसी की खामियों को दूर करने के लिए उच्चतम न्यायालय से अपील करेंगे.

गठबंधन सहयोगी भी असंतुष्‍ट
असम में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल असम गण परिषद (अगप) ने एनआरसी की अंतिम सूची पर असंतोष जताते हुए शनिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय में इसकी समीक्षा की गुंजाइश है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है.