नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी भले  सरकार बनाने की ओर है, लेकिन हरियाणा में फिलहाल सत्ता की चाबी किसी को भी मिलते नहीं दिख रही है. सत्तारूण बीजेपी ने 75 सीटें हासिल करने का अभियान चलते हुए नारा दिया था, लेकिन अब तक आए रुझानों में पार्टी बहुमत से बीजेपी रहते हुए 38 सीटों पर सिमटते दिख रही है. कांग्रेस को 31 सीटें मिलते दिख रही हैं. जबकि जेजेपी 10, आईएनएलडी व अन्य के खाते में 12 सीटें जाते दिख रही हैं.

हरियाणा में तमाम दावे फेल होने के बाद बीजेपी में हलचल मच गई है. पार्टी आलाकमान ने सीएम मनोहर लाल खट्टर को दिल्ली आपात बैठक के लिए बुला लिया है. जबकि हरियाणा में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने उम्मीद के मुताबिक़ नतीजे नहीं आने पर पद छोड़ दिया है. सूत्रों के मुताबिक़ उन्होंने अमित शाह को इस्तीफा दिया है. सुभाष बराला टोहना विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं, लेकिन वह खुद ही जेजेपी के उम्मीदवार देवेंद्र सिंह से पीछे चल रहे हैं.

51 साल के बराला को हार का सामना भी करना पड़ सकता है. वह 22 हजार वोटों से पीछे हैं. बराला जिस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वह उसी इलाके के ही रहने वाले हैं. इंजीनियरिंग कर चुके बराला ने नतीजों को देख पहले ही पद छोड़ दिया है.

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वहीं, हरियाणा के वित्त मंत्री व नारनौंद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि अब तक जैसे रुझान आ रहे हैं, मुझे ऐसा लगता है कि जनता ने जननायक जनता पार्टी के पक्ष में मतदान किया है. हम जनता के फैसले का सम्मान करते हैं. गौरतलब है कि कैप्टन अभिमन्यु भी जीतते नहीं दिख रहे हैं.

बता दें कि हरियाणा के सभी नब्बे सीटों के शुरुआती रुझान आ चुके हैं और यह इन नतीजों में गौर किया जाए तो यह राज्य में मौजादा सरकार की चिंता को बढ़ाने वाले हैं. ताजा नतीजों के आधार पर सरकार के कुल सात मंत्री पीछे चल रहे हैं. आज से पहले यह माना जा रहा था कि भाजपा की एकतरफा जीत होगी और कांग्रेस को करारी शिकस्त मिलेगी, लेकिन नतीजे कुछ और ही कह रहे हैं. इसी का नतीजा है कि मंत्री कैप्टन अभिमन्यु सहित सरकार के सात मंत्री अपनी सीट से पीछे चल रहे हैं.

अभी तक के नतीजों को देखकर ऐसा लग रहा है कि राज्य में त्रिशंकु सरकार बन सकती है और यदि ऐसा होता है तो दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी प्रदेश में प्रमुख रोल निभाएगी. अगर भाजपा को बहुमत नहीं हासिल होता तो दूसरी पार्टियों को सरकार बनाने के लिए जेजेपी से हाथ मिलाना पड़ेगा. ऐसे में दूसरी राजनीतिक पार्टियों के लिए सरकार बनाने के लिए चाबी दुष्यंत चौटाला के पास ही रहेगी.

बता दें कि हरियाणा में 2014 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटों, कांग्रेस ने 15 सीटों पर जीत प्राप्त की थी. हरियाणा जनहित कांग्रेस के दो विधायक बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इनेलो ने 19, बसपा और शिअद ने एक-एक सीट अपने नाम की थी. पांच सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के पास गई थीं.