नई दिल्ली: हरियाणा में भाजपा (Bhartiya Janta Party) को लगता है कि वह विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) में ’75 प्लस’ सीटों के नारे को हकीकत बना सकती है. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में 33.2 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 47 सीटें जीतने वाली भाजपा के नेता चुनावी रैलियों में 75 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं.

75 पार के नारे में कितना दम? पूछने पर भाजपा के नेता, एक तरफ मनोहर लाल खट्टर सरकार (Manohar Lal Khattar Government) के कार्यो को वजह बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्षी दलों (Opposition Parties) के बिखराव में भी सीटों का फायदा देख रहे हैं. हरियाणा में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद यादव (Arvind Yadav) का मानना है कि 2014 के मुकाबले अब हालात ज्यादा अनुकूल हैं. पहले हुड्डा की कांग्रेस सरकार से भाजपा को सत्ता छीननी पड़ी थी, मगर अब तो भाजपा पांच साल के काम का लेखा-जोखा लेकर चुनाव मैदान में उतरी है.

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा, “सूबे में विपक्ष साफ है. एक तरफ चौटाला साहब का परिवार है, जो दो-दो पार्टियां लेकर घूम रहा है. पार्टी (इनेलो) में इस कदर फूट है कि दादा को पोते को ही पार्टी से बाहर करना पड़ा, दूसरी तरफ कांग्रेस है, जिसमें छह साल प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को ही पार्टी छोड़नी पड़ी है.” उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ विपक्ष के कमजोर होने से ही भाजपा 75 सीटें जीतने का ख्वाब नहीं देख रही है. इसके पीछे कई वजहें हैं. मसलन, खट्टर सरकार में नौकरियों की दलाली नहीं हुई. मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के दाग नहीं लगे, 358 से ज्यादा सुविधाओं को अटल सेवा केंद्रों के जरिए ऑनलाइन कर दिया गया, जिससे बिचौलियों की समस्या खत्म हुई. यादव ने कहा, “सीएम खट्टर ने ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर धंधा नहीं चलने दिया. सभी तरह के टेंडर ऑनलाइन हुए. योजनाओं की धनराशि लाभार्थियों के खाते में सीधे भेजी गई.” हालांकि विपक्षी कांग्रेस के नेता भाजपा के इस दावे को सच से परे बताते हैं.

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हरियाणा में क्या है विपक्ष का हाल?
चुनावी मौसम में विपक्षी दलों के नेताओं के बीच मची अंतर्कलह को भाजपा अपने लिए मुफीद मान रही है. कांग्रेस (Congress) की बात करें तो प्रदेश संगठन में मची रार के चलते पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पार्टी छोड़ चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) से मची रार जब लाख कोशिशों के बाद भी नहीं सुलझी तो पार्टी ने छह साल से संगठन देख रहे तंवर को हटाकर कुमारी शैलजा (Kumari Shailja) को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी. लड़ाई में हुड्डा के भारी पड़ने पर अब अशोक तंवर पार्टी में टिकट बिकने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ चुके हैं.