नई दिल्ली: विदेश में पढ़ाई की, विदेश में ही अच्छी जॉब में थीं. पिता राजनीति में थे और विधानसभा चुनाव में उतरे. पिता का साथ देने उनकी दोनों बेटियां विदेश से वापस आईं. पिता दो सीट पर चुनाव मैदान में उतरे. दोनों बेटियां ने भी दो-दो सीटों पर चुनाव लड़ने उतर गईं. इरादा राजनीति में आकर हालात बदलने का था, लेकिन चुनावी नतीजों में पिता और विदेश से वापस आकर यहां राजनीति करने आईं दोनों बेटियों का जो हश्र हुआ, उससे लोग हैरत में हैं. छह सीटों पर तीनों में से कोई भी 1000 वोटों का भी आंकड़ा नहीं छू सका. पिता और उनकी दोनों बेटियों को सभी छह सीटों को मिलाकर कुल 1516 वोट मिल पाए. तीनों दो-दो यानी कुल सीटों पर चुनाव लड़े थे.

सब कुछ छोड़कर इंग्लैंड से आईं थीं राजनीति करने
ये हुआ नॉर्थईस्ट के राज्य मिजोरम में. यहां 11 दिसंबर तक कांग्रेस सत्ता में थी, लेकिन विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद यहां पूर्ण बहुमत से मिजो नेशनल पार्टी (एमएनएफ) सत्ता में आ गई. कांग्रेस सहित कई और भी पार्टियां मैदान में थीं, उसी तरह से ज़ोरम थार पार्टी भी चुनाव मैदान में थी. जाइछावना हलवांडो (Zaichhawna Hlawndo) द्वारा बनाई गई जोरम थार पार्टी ने खूब प्रचार प्रसार किया. जाइछावना ह्लौंडो की बेटियों ललरुअतफेली हलवांडो और ललहिरजेली हलवांडो को पता चला तो वह पिता का हाथ बंटाने इंग्लैंड से मिजोरम आ गईं.

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कुछ कर गुजरना चाहती थीं
जाइछावना की दोनों बेटियां इंग्लैंड में थीं. इनमें से 26 साल की ललरुअतफेली इंग्लैंड में पढ़ाई पूरी करने के बाद बाइबिल कॉलेज में अफसर थीं. अच्छी नौकरी थी, लेकिन अपनी 28 साल की बड़ी बहन ललहिरजेली के साथ वह मिजोरम आ गईं. यहां आने के बाद दोनों ने चुनाव लड़ने का फैसला किया. मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में ललरुअतफेली ने कहा कि वह मिजोरम बदलना चाहती हैं. यहां भ्रष्टाचार है. महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं हैं. युवा हैं. इसलिए युवाओं के लिए कुछ करना चाहती हैं. इन्हीं सब मुद्दों को लेकर वह चुनाव मैदान में उतरी थीं.

मिली निराशा, 6 सीट पर 2000 वोटों का आंकड़ा भी नहीं छू सके
11 दिसंबर को आये नतीजों से पिता के साथ ही इन दोनों बेटियों के हाथ भी घोर निराशा हाथ लगी. तीनों सभी छह सीटों पर बुरी तरह से चुनाव हार गए. पिता जाइछावना मिजोरम की आइज़वाल वेस्ट-1 व सेरचिप से चुनाव लड़े. उन्हें यहां 228 व 278 वोट मिले. 28 साल की उनकी बेटी ललहिरजेली आइज़वाल नॉर्थ-2 व लेंगटोंग सीट से प्रत्याशी थीं. उन्हें क्रमशः 98 व 77 वोट मिले, जबकि 26 साल की ललरुअतफेली को 700 व 135 वोट मिले. वह आइज़वाल नार्थ-1 व तेइकुम सीट से चुनाव लड़ी थीं. तीनों ही सभी जगहों पर चौथे-पांचवें स्थान पर रहीं.

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सोशल मीडिया पर हार के साथ खूबसूरती की भी चर्चा
इन दोनों बहनों ने चुनाव के दौरान कहा था कि वह काफी कुछ बदलना चाहती हैं. ललरुअतफेली हलवांडो ने कहा था कि अगर वो चुनाव जीतीं तो समाज में गरीबी व बेरोजगारी दूर करने के लिए अपना सब कुछ झोंक देंगी. मिजोरम की महिलाओं के लिए नया मार्केट तैयार करके रोजगार के नए अवसर मुहैया कराएंगीं, लेकिन उनके ये वादे लोगों को नहीं भाए. सोशल मीडिया पर हार और इनकी खूबसूरती भी चर्चा का विषय बनी हुई है.