नई दिल्ली: पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बूते मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को शिकस्त देकर कांग्रेस मंगलवार को सत्ता की दहलीज पर पहुंच गई. वहीं, मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. अंतिम समाचार मिलने तक कांग्रेस 114 और भाजपा 109 सीटों पर आगे चल रही है. राजस्थान में कांग्रेस बीजेपी को हराने में कामयाब रही, लेकिन बहुमत से एक सीट दूर रह गई. हालांकि, आरएलडी के समर्थन से उसे बहुमत लायक समर्थन मिल गया. आरएलडी का एक विधायक जीता है. राज्य में 199 सीटों के लिए मतदान हुआ था. कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं जबकि भाजपा के खाते में 73 सीटें आईं. तेलंगाना में विधानसभा चुनाव में टीआरएस ने प्रचंड बहुमत हासिल करके लगातार दूसरे कार्यकाल के लिये सत्ता में आना सुनिश्चित कर लिया है. वहीं मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने कांग्रेस को पूर्वोत्तर में उसके आखिरी गढ़ में हराकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी की है. Also Read - यूपी के मंत्री ने कहा- कांग्रेस ने भ्रम फैलाकर पाया वोट, पछता रहे हैं मध्यप्रदेश के लोग

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हिंदी पट्टी में भाजपा के खराब प्रदर्शन ने 2019 के लोकसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. कुछ महीने पहले तक माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में राजग का पलड़ा भारी है. सिंहासन का सेमीफाइनल बताए जा रहे इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ये नतीजे मोदी सरकार के लिये ‘स्पष्ट संदेश’ हैं कि जनता उससे खुश नहीं है और बदलाव का समय आ गया है. Also Read - सवाल- केंद्र की राजनीति में जाने वाले हैं? 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का जवाब- 'यहीं हूं मैं'

राहुल ने संवाददाताओं से कहा कि नरेंद्र मोदी को जबर्दस्त जनादेश मिला, लेकिन उन्होंने देश की धड़कन को सुनने से इंकार कर दिया. छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस के सरकार बनाने को तैयार होने और मध्य प्रदेश में कड़ी टक्कर के बीच राहुल ने कहा कि तीनों राज्यों में मुख्यमंत्रियों का चयन ‘सुगमता’ से किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘हमने भाजपा को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हराया है- मुख्यमंत्रियों के चयन को लेकर कोई मुद्दा नहीं रहेगा.’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनावों में जीत के लिए कांग्रेस, टीआरएस और एमएनएफ को बधाई देते हुए कहा कि भाजपा विनम्रता से लोगों के फैसले को स्वीकार करती है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नतीजे निश्चित रूप से अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे और चुनाव नतीजे ठहरकर विश्लेषण करने का अवसर हैं.

चौंकाने वाले नतीजे में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने 15 साल से चल रहे रमन सिंह के शासन का अंत कर दिया है और दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सफल रही. चुनाव आयोग से प्राप्त ताजा नतीजों और रुझानों के अनुसार कांग्रेस ने 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में 53 सीटों पर जीत हासिल की है और 15 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, भाजपा ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि चार पर बढ़त बनाए हुए है. रमन सिंह ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया और उन्होंने कहा कि वह भाजपा के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं. उन्होंने रायपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम (पार्टी) बैठेंगे और आत्ममंथन करेंगे.’’ राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी जयपुर में राज्यपाल कल्याण सिंह को अपना त्यागपत्र सौंप दिया.

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ताजा रुझानों के मुताबिक मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिये कांग्रेस 114 सीटों पर आगे या जीत दर्ज कर रही है जबकि भाजपा 109 सीटों पर आगे या जीत दर्ज कर रही है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 41.2 फीसदी मत मिले हैं. सत्ता विरोधी लहर से जूझ रहे तीन बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी सीट से चुनाव जीत गए हैं, लेकिन उनकी सरकार के दर्जन भर मंत्री कांग्रेस उम्मीदवारों से पीछे चल रहे हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि रुझान मध्य प्रदेश में बदलाव के लिये लोगों की इच्छा को दर्शाते हैं जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाएगी.

राजस्थान के नतीजे राज्य में 20 साल से एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस को राज्य की सत्ता सौंपने के पुराने रुझान को ही दोहराते दिख रहे हैं. प्रदेश की निवर्तमान विधानसभा में भाजपा के पास 163 और कांग्रेस के पास 21 सीटें थीं. राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं, लेकिन अलवर की रामगढ़ सीट से बसपा उम्मीदवार की मृत्यु की वजह से वहां चुनाव स्थगित हो गया. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने जयपुर में कहा, ‘‘रुझान दर्शाते हैं कि कांग्रेस राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत की ओर बढ़ रही है. हमें विश्वास है कि यह रुझान समूचे देश में जारी रहेगा.’’ राज्य में कौन मुख्यमंत्री होगा इसका फैसला करने के लिये कांग्रेस जयपुर में विधायक दल की बैठक करेगी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सलाह-मशविरा करने के बाद पार्टी राज्य में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी घोषणा करेगी. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट इस पद के लिये प्रमुख दावेदार हैं.

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तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) लगातार दूसरी बार अपनी सरकार बनाएगी. वहां पार्टी को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है. टीआरएस ने 87 सीटों पर जीत हासिल कर ली है और एक अन्य सीट पर उसके उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं. ये नतीजे मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की लोकप्रियता पर मुहर लगाते हैं. राव ने खुद गजवेल सीट पर 51000 से अधिक मतों से जीत हासिल की. उन्होंने कांग्रेस के वी प्रताप रेड्डी को करारी शिकस्त दी. राव के पुत्र के टी रामराव और उनके भतीजे हरीश राव भी जीत गए हैं. दोनों चंद्रशेखर राव की कार्यवाहक सरकार में मंत्री हैं. कांग्रेस ने राज्य में 19 सीटों पर जीत हासिल की है. उसकी सहयोगी तेदेपा ने दो सीटें जीतीं. कार्यवाहक मुख्यमंत्री राव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘टीआरएस विधानसभा चुनाव में अपनी जीत को तेलंगाना की जनता को समर्पित करती है.’’ राव ने कहा कि तेलंगाना गैर कांग्रेसी, गैर भाजपाई राज्य साबित हुआ. उन्होंने साथ कहा कि टीआरएस राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. राव ने निर्धारित कार्यकाल से आठ महीने पहले ही सितंबर में विधानसभा को भंग करके जो राजनैतिक दांव चला था, उसका अच्छा नतीजा उन्हें देखने को मिला. राज्य की 119 सदस्यीय विधानसभा में पिछले चुनाव में टीआरएस को 63 सीटें मिली थीं. कांग्रेस और तेदेपा विधायकों के दलबदल करके टीआरएस में शामिल हो जाने से उसके विधायकों की संख्या पिछली विधानसभा में 82 हो गई थी.

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मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने राज्य की 40 सीटों में से 26 सीटें जीतकर राज्य में साधारण बहुमत हासिल कर लिया है. इसके साथ ही पूर्वोत्तर में एकमात्र राज्य जहां कांग्रेस सत्ता में थी, वह भी उसके हाथ से निकल गई. राज्य में कांग्रेस को पांच सीटें मिली हैं. मिजोरम के मुख्यमंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार ललथनहवला सेरछिप और चम्फाई दक्षिण दोनों सीटों से चुनाव हार गए. राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का जश्न पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय के बाहर जमा होकर आतिशबाजी करके मनाया. पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाजपा शासित इन तीनों राज्यों में कांग्रेस को जीत की ओर ले जाने के लिये राहुल गांधी के नेतृत्व की सराहना की.