नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों पर सहायक प्रोफेसर की नौकरी के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों से एक से अधिक बार आवेदन शुल्क वसूलने का आरोप लगा है. कॉलेजों पर यह भी आरोप है कि आवेदन शुल्क वसूलने के बाद न तो आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और न ही उनके पैसे वापस किए गए. वहीं डीयू के डीन देवेश के सिन्हा का कहना है कि उनके पास आवेदकों की संख्या और जमा किए गए शुल्क से संबंधित आंकड़े नहीं हैं. Also Read - Delhi University Admission 2021: दिल्ली विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में करने जा रहा है ये बदलाव, अब इस प्रोसेस के जरिए होगा एडमिशन 

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अकेडमिक काउंसिल के सदस्य और श्री अरबिंदो कॉलेज के प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया कि आवेदन शुल्क के रूप में बड़ी ‘अघोषित धनराशि’ जमा है. सुमन ने बताया, “ करीब 40 कॉलेजों ने दो साल पहले सहायक प्रोफेसर के पद पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे. इसमें सामान्य वर्ग के लिए 500 रुपये , ओबीसी, एससी/एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए के लिए 250 रुपये आवेदन शुल्क रखा गया था.” उन्होंने बताया कि न ही आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और न ही उनके आवेदन शुल्क वापस किए गए. उन्होंने बताया कि नए कुलपति के फरवरी 2016 में कार्यभार संभालने के बाद एससी/एसटी उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट दे दी गई थी. Also Read - Delhi University Reopening: इस दिन से खुलेंगे दिल्ली विश्वविद्यालय, जानिए इसको लेकर क्या होगी व्यव्स्था

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आरोपों का जवाब देते हुए सिन्हा ने बताया कि वह इस मामले को देखेंगे और कॉलेजों से आवेदकों को शुल्क वापस देने का निर्देश देंगे.

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डीयूटीए)के अध्यक्ष राजीब राय ने बताया कि कुछ ऐसे भी कॉलेज हैं जिन्होंने एक ही पद के लिए कई बार आवेदन आमंत्रित किए और एक बार भी आवेदकों का साक्षात्कार नहीं लिया.