नई दिल्लीः प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यापक स्तर पर स्वागत हुआ है. इसी बहाने देश के और किन-किन इबादत स्थलों या मंदिरों में ऐसी परंपरा है इसकी भी चर्चा हो रही है. कुछ ऐसी ही परंपरा राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित प्रसिद्ध निजामुद्दीन दरगाह की है. यहां पर महिला जायरिनों को दरगाह के आंतरिक हिस्से में प्रवेश की अनुमति नहीं है. तभी तो देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक को दरगाह से बाहर रहना पड़ा था. उनको दरगाह में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली थी. इस दरगाह की परंपरा है कि केवल पुरुष जायरीन ही ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया की कब्र तक जा सकते हैं.

सबरीमाला मंदिर की तरह यहां भी महिलाएं दरगाह के भीतर प्रवेश नहीं कर सकतीं. उनको बाहर से ख्वाजा की इबादत करनी होती है. हमारे सहयोगी अखबार डीएनए से  इस दरगाह की देखरेख करने वाले अजहर निजामी ने कहा कि उनके वसूल पक्के हैं. सभी के लिए बराबर है. खुद उनके परिवार की किसी भी महिला सदस्य ने इस दरगाह में प्रवेश नहीं किया है. अजहर, निजामी खानदान के सदस्य हैं. उनका कहना है कि यह परंपरा 700 साल पुरानी है.

उन्होंने कहा कि दरगाह के वसूल कभी नहीं बदले गए. यहां तक कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुसर्रफ भारत आए थे और उन्होंने दरगार को तय समय से पहले खोलने का अनुरोध किया लेकिन उनके भी अनुरोध को ठुकरा दिया गया. अजहर ने कहा कि हमने वीआईपी के लिए कभी भी नियम नहीं बदले. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अक्सर बाहर से ही दरगार में इबादत करती थीं.

वैसे राजधानी में निजामुद्दीन दरगाह ही ऐसी पूजा स्थली नहीं है जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित हो. निजामुद्दीन दरगाह के परिसर में ही स्थित आमिर खुसरो का भी दरगाह है, जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. यहां महिलाएं प्रवेश द्वार पर बनाए गए जाली पर धागे बांधकर जियारत करती हैं.