नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत खराब है. उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया है. 18 डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है. अस्पताल की ओर से रात पौने ग्यारह बजे जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में एम्स ने कहा है कि वाजपेयी को लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और किडनी संबंधी दिक्कतों के बाद भर्ती कराया गया. जांच में उन्हें यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन निकला है. बुलेटिन में कहा गया है कि वाजपेयी का उचित इलाज किया जा रहा है और उन्हें डॉक्टरों की एक टीम की निगरानी में रखा गया है.

स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अटल बिहारी वाजपेयी अभी मुश्किलों में हैं. वह खुद कहते थे कि परेशान होने पर वह कविता लिखते थे. ऐसी स्थिति में उनकी लिखित और काफी चर्चित कविता याद आती है…

हार नहीं मानूँगा – अटल बिहारी बाजपेयी

गीत नहीं गाता हूँ.
बेनक़ाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूँ
गीत नहीं गाता हूँ.

लगी कुछ ऐसी नजर,
बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पता हूँ.
गीत नहीं गाता हूँ.

पीठ पर छुरी चाँद,
राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बंध जाता हूँ
गीत नहीं गाता हूँ.

[कवि की मन: स्थिति बदलती है, वह आशावादी हो जाता है.]

गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए तारों से, फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरूढ़िमा की रेत देख पाता हूँ
गीत नया गाता हूँ.

टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी,
अन्तः को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी,
हार नहीं मानूँगा,
रार नयी ठानूंगा,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ