नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके सभी भाई-बहन अपने पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी को ‘बाप जी’ कहकर संबोधित करते थे. शिक्षक पिता के सभी बच्चों पर घर के शैक्षणिक माहौल और अनुशासन का काफी असर देखने को मिलता था. उनके पिता ग्वालियर के गोरखी विद्यालय में शिक्षक थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने मिडिल क्लास तक की पढ़ाई अपने पिता के स्कूल से ही की थी. अटल के पिता नौकरी से रिटायर होने के बाद भी शिक्षा के प्रति गंभीर रहते थे. कविता से तो उनका नाता था ही, घर और आसपास में भी उन्हें पढ़ाकू किस्म का माना जाता था. अपने खाली समय में भी पठन-पाठन करते रहते थे. इसलिए बेटे अटल ने जब कानपुर के डीएवी कॉलेज में लॉ की पढ़ाई यानी एलएलबी में दाखिला लिया तो पिता भी साथ हो लिए. दोनों पिता-पुत्रों का एक साथ कॉलेज जाना दूसरों के लिए कौतूहल से कम नहीं था. इसलिए दूर-दूर से लोग इन्हें देखने आते थे. Also Read - अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन में हुए खर्च का भुगतान करेगी योगी सरकार, विवाद बढ़ा तो उठाया कदम

Also Read - शर्मनाकः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन में खर्च पर विवाद, LDA ने सरकार से मांगा पैसा

कोलकाता के बेरीवाल परिवार से क्‍या है वाजपेयी का रिश्‍ता, उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहा है परिवार Also Read - स्मृति शेष: जब मुर्शरफ ने वाजपेयी से कहा, आप प्रधानमंत्री होते तो नजारा कुछ और होता

हॉस्टल के एक कमरे में रहते थे दोनों

अटल बिहारी वाजपेयी ने एम.ए और एल.एल.बी साथ करने की योजना बनाई थी. लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका. इधर, पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ने भी लॉ पढ़ने की योजना बना ली. अतः पिता-पुत्र दोनों ने कानपुर के डी.ए.वी. कॉलेज में दाखिला ले लिया. यह कॉलेज भी आगरा विश्वविद्यालय से ही संबद्ध था. यहां दोनों हॉस्टल के एक ही कमरे में रहते और उन्हें प्रवेश भी एक ही सेक्शन में मिला था. उस समय यह बड़ी घटना थी कि पिता और पुत्र एक ही कक्षा में एक ही सेक्शन में साथ पढ़ते थे. इसलिए उन्हें देखने दूर-दूर से लोग आते थे. रोचक बात यह होती थी कि जब किसी दिन कृष्ण बिहार कक्षा में अनुपस्थित होते तो शिक्षक अटल से पूछते थे कि उनके पिता कहां हैं? कक्षा में क्यों नहीं आए? इसी तरह जब अटल कक्षा में नहीं होते तो यही प्रश्न उनके पिता से पूछा जाता. इस पर कक्षा में ठहाके गूंज उठते थे. ऐसी घटनाएं बार-बार होने लगीं तो थक-हारकर अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना सेक्शन बदलवा लिया.

स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार में था साहित्य का माहौल, ताजमहल पर लिखी थी पहली कविता

स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार में था साहित्य का माहौल, ताजमहल पर लिखी थी पहली कविता

परिवार में सबके प्यारे थे अटल

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर में स्थित शिंदे की छावनी में हुआ था. 25 दिसंबर 1924 को जब गिरजाघरों में ईसा मसीह के जन्म की घंटियां बज रही थीं, उस पवित्र बेला में अटल का जन्म हुआ. भरा-पूरा परिवार था और ऐसे शुभ अवसर पर बालक का जन्म लेना, किसी भी घर में शुभ माना जाता है. यही वजह है कि बचपन से ही अटल को पूरे परिवार का भरपूर स्नेह मिला. बड़े भाइयों के अलावा बहन विमला, कमला और उर्मिला भी बालक अटल पर स्नेह उड़ेलती थीं. परिवार में सबके प्यारे अटल को खिलाने के लिए घर के सदस्यों में होड़ मची रहती थी. इसलिए सबके लिए समय तय कर दिया गया था. यह निर्धारित कर दिया गया था कि एक समय अवध खिलाएंगे तो एक समय उर्मिला. वहीं, दादा श्यामलाल भी पौत्र से बहुत स्नेह करते थे और उसे अपने साथ अक्सर बटेश्वर ले जाते थे. दादी सुखदेवी प्यार से अपने पोते को ‘अटल्ला’ कहकर बुलाती थीं. घर-परिवार के भरपूर स्नेह के बीच अटल बिहारी वाजपेयी का पालन-पोषण हुआ था.

(इनपुट – महेश शर्मा लिखित जननेता अटल बिहारी वाजपेयी से साभार)