एम्स से अटल जी का पार्थिव शरीर उनके घर ले जाया गया.
नई दिल्ली। एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निमोनिया से पीड़ित थे और उनके कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. उन्होंने कहा कि 93 वर्षीय वयोवृद्ध नेता को उनके जीवन के अंतिम दिन एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजिनेशन (ईसीएमओ) सपोर्ट पर रखा गया था.
11 जून से थे एम्स में भर्ती
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ने आज वाजपेयी के निधन की घोषणा की. पूर्व प्रधानमंत्री को कई समस्याओं को लेकर 11 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एक डॉक्टर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि वह निमोनिया से पीड़ित थे और गुर्दा सहित उनके कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. उन्हें अंतिम दिन ईसीएमओ सपोर्ट पर रखा गया था.
एसीएमओ के जरिए ऐसे मरीजों को दिल और श्वसन संबंधी सपोर्ट दिया जाता है, जिनके हृदय और फेफड़े सही तरीके से अपना काम नहीं कर पाते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री को गुर्दे और मूत्र नली के संक्रमण, कम मूत्र होने और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने कहा कि समय-समय पर उनकी डायलिसिस की जा रही थी.
2009 में लगा था आघात
डॉक्टरों ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को लेपन के लिए शरीर-रचना विभाग को भेजा गया है. वाजपेयी मधुमेह से पीड़ित थे और उनका केवल एक गुर्दा ही काम कर रहा था. साल 2009 में उन्हें आघात लगा था जिससे उनकी संज्ञानात्मक क्षमताएं कमजोर हो गई थीं. कुछ समय बाद उन्हें डिमेंशिया हो गया था. देश के सबसे करिश्माई नेताओं में से एक वाजपेयी का आज एम्स में निधन हो गया. वह 93 साल के थे.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.