नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के दूत बैरी ओ फरेल ने बुधवार को कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नियम और तकाजे को लेकर स्थापित व्यवस्था का भारत और ऑस्ट्रेलिया पालन कर रहे हैं लेकिन चीन ऐसा नहीं कर रहा. ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त ने जोर दिया कि दक्षिण चीन सागर में चीन एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने का प्रयास कर रहा है. यह इस विषय पर बनी आम सहमति और वार्ता के मुताबिक नहीं है. Also Read - भारत को मिला अमेरिका का समर्थन, माइक पॉम्पिओ बोले- चीन को भारत ने दिया सही जवाब

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझा चिंताएं हैं. उन्होंने कहा कि चीन ने अच्छा विकास किया है लेकिन ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के दौर में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए बने नियम और तकाजे की व्यवस्था की हिफाजत करने की जरूरत है . Also Read - पाकिस्तान ने कहा- कुलभूषण जाधव ने अपील दायर करने से मना किया, भारत ने दावे को बताया ‘स्वांग’

ओ फरेल ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से हमारे लिए चिंता करने की वजह है कि हम इस प्रारूप का जितना पालन कर रहे हैं, बीजिंग इसके लिए समर्पित नहीं है.’’ यह पहला मौका नहीं है जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत के पक्ष में बयान दिया है. Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

हाल ही कुछ दिन पहले भी ऑस्ट्रेलियाई दूत ने परोक्ष रूप से चीन पर कड़ा प्रहार किया है. बैरी ओफ्रेल ने कहा था कि कुछ देश अपनी सीमा से बाहर के क्षेत्र में जबर्दस्ती दखल देते हुए अनावश्यक तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं, जो कि स्वीकार्य नहीं है. बैरी ओ फ्रेल ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र और मुक्त रखना भारत और ऑस्ट्रेलिया की जिम्मेदारी है.