नई दिल्ली. देश में धार्मिक पहचान के कारण घृणा अपराधों के बढ़ते मामलों पर चिंता प्रकट करते हुए प्रबुद्ध नागरिकों के एक समूह ने बीते 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा. इसमें कहा गया है कि ‘‘जय श्री राम’’ का उद्घोष भड़काऊ नारा बनता जा रहा है और इसके नाम पर पीट-पीट कर हत्या के कई मामले हो चुके हैं. पीएम नरेंद्र मोदी के नाम खुला खत लिखे जाने का यह मामला अब तूल पकड़ने लगा है. कई केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा नेताओं ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार को अस्थिर करने के लिए ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग फिर से सक्रिय हो गया है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि देश में दलित और अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं.

फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन और अपर्णा सेन, गायिका शुभा मुद्गल और इतिहासकार रामचंद्र गुहा, समाजशास्त्री आशीष नंदी सहित 49 नामी शख्सियतों ने 23 जुलाई को यह पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि ‘‘असहमति के बिना लोकतंत्र नहीं होता है.’’ इस पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. सिंह ने पत्रकारों से कहा, “मॉब लिंचिंग का सवाल उठाने वाले यह लोग तब कहां थे जब कैराना (उत्तर प्रदेश) के विधायक हाल ही में मुसलमानों को हिंदुओं की दुकानों से सामान नहीं खरीदने के लिये कह रहे थे. वे क्यों खामोश रहे?” पत्र के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा लगता है कि ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग सक्रिय हो गया है. मंत्री ने कहा, “अवॉर्ड वापसी गैंग मोदी सरकार को बदनाम करने और उसे अस्थिर करने के मकसद से फिर सक्रिय हो गया है.”

इधर, पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाले प्रबुद्ध नागरिकों को बुधवार को राष्ट्रविरोधी करार दिया. उन्होंने इन बुद्धिजीवियों पर आरोप लगाया कि वे विपक्ष की कठपुतली के रूप में अभिनय कर रहे हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम के नाम लिखे गए खुला पत्र को लेकर कहा कि वह यह बात काफी लंबे समय से कह रही हैं. बनर्जी ने कहा कि जब भी देश में कोई समस्या होती है, जब भी सामाजिक समझ की आवश्यकता होती है, ये प्रमुख व्यक्तित्व सामने आते हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं. तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा, “मैंने कई बार देखा है कि कई भाषण जो नहीं कर सके, उसे एक गीत ने कर दिखाया.’’ बनर्जी ने यहां संवाददाताओं से कहा, “मैं उनका सम्मान करती हूं. मुझे लगता है कि उन्होंने जो भी कहा है वह काफी सही है. उन्होंने आज जो कुछ भी कहा है, मैं उसे लंबे समय से कह रही हूं.”

हालांकि इस पत्र को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ने से पहले सरकार ने संसद में भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) को लेकर अपना मत स्पष्ट किया. बुधवार को सरकार ने मॉब लिंचिंग का संबंध किसी दल विशेष से नहीं होने का दावा करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में मॉब लिंचिंग का एक समान स्वरूप नहीं है. विभिन्न राज्यों में अलग अलग कारणों से ऐसी घटनायें दर्ज की गई हैं. गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया, ‘‘प्राप्त तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि देश में मॉब लिंचिंग का एक समान स्वरूप नहीं है. विभिन्न राज्यों में अलग अलग कारणों से इस तरह की घटनाएं हुई हैं.’’ रेड्डी ने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले ही देश को मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से बचने के बारे में लोगों से अपील कर चुके हैं.

(इनपुट – एजेसियां)