Ayatollah Khamenei Relations With India From Kashmir To Caa Truth Behind His Politics Of Sacrifice
क्या अयातुल्लाह खामेनेई थे भारत के दोस्त? कश्मीर से CAA तक बयानबाजी और 'त्याग' की सियासत का सच
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) ने 2017 से 2024 के बीच कई बार भारत के आंतरिक मुद्दों कश्मीर, अनुच्छेद 370, CAA और दिल्ली दंगों पर सार्वजनिक बयान दिए. भारत सरकार ने हर बार इसे आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए आपत्ति जताई.
Ayatollah Khamenei Relations with India: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) का भारत के साथ रिश्ता हमेशा संतुलित नहीं रहा. भले ही भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सामरिक रिश्ते रहे हों, लेकिन खामेनेई के सार्वजनिक बयान कई बार नई दिल्ली के लिए असहज स्थिति पैदा करते रहे.
सबसे पहले 2017 में खामेनेई ने कश्मीर मुद्दे पर ‘उत्पीड़ित मुसलमानों’ के समर्थन की बात कही. उस समय भारत ने कश्मीर पर कोई नई नीति घोषित नहीं की थी, फिर भी उनका बयान पाकिस्तान के आधिकारिक रुख से मेल खाता दिखा. अगस्त 2019 में जब भारत ने अनुच्छेद 370 हटाया, तब भी उन्होंने भारत से ‘न्यायपूर्ण नीति’ अपनाने की मांग की. इसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूत को तलब कर इस टिप्पणी को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया.
CAA और दिल्ली दंगों के दौरान खामेनेई के ट्वीट
मार्च 2020 में CAA और दिल्ली दंगों के दौरान खामेनेई ने ट्वीट कर ‘कट्टर हिंदुओं का सामना करने’ की बात कही और #IndianMuslimsInDanger हैशटैग का इस्तेमाल किया. भारत सरकार ने इसे एकतरफा और भ्रामक करार दिया, क्योंकि दंगों में दोनों समुदायों को नुकसान हुआ था. 2024 में उन्होंने भारत की तुलना गाजा और म्यांमार से की, जिसे भारत ने ‘गलत और अस्वीकार्य’ बताया.
इन बयानों से साफ है कि खामेनेई की टिप्पणियां अक्सर भारत की संप्रभुता और आंतरिक नीति से टकराती रहीं. ऐसे में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की तरफ से उनकी मौत पर सरकार की ‘चुप्पी’ को भारत की ‘विरासत का त्याग’ बताना राजनीतिक बहस को और हवा देता है.
IAEA में भारत ने ईरान के खिलाफ मतदान किया था
इतिहास पर नजर डालें तो 2005, 2006 और 2009 में IAEA में भारत ने ईरान के खिलाफ मतदान किया था, जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार सत्ता में थी. उस समय भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की बातचीत चल रही थी. वहीं, 2022 में NDA सरकार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक प्रस्ताव में मतदान से दूरी बनाई. ये दर्शाता है कि भारत की विदेश नीति का आधार नैतिकता से अधिक राष्ट्रीय हित रहा है.
ईरान आज पश्चिम एशिया में कई सैन्य तनावों में उलझा है. भारत के लिए खाड़ी देशों सऊदी अरब, यूएई, बहरीन से संबंध और वहां बसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत कर भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जोर दिया है. खामेनेई को ईरान में महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर भी आलोचना झेलनी पड़ी. उनके शासनकाल में कई सामाजिक बैन सख्त रहे. वैश्विक स्तर पर उनकी मौत पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं. कुछ देशों ने शोक जताया, तो कुछ ने राहत की भावना व्यक्त की.
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सवाल ये नहीं है कि भारत ने किसी को ‘त्याग’ दिया या नहीं. असल सवाल ये है कि क्या खामेनेई का रिकॉर्ड भारत के प्रति मित्रवत था? उपलब्ध घटनाएं बताती हैं कि उनके बयान अक्सर भारत की नीतियों की आलोचना करते रहे. ऐसे में भारत की प्रतिक्रिया संयम, संवाद और राष्ट्रीय हित एक व्यावहारिक कूटनीतिक रुख के रूप में देखी जा सकती है.
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