नई दिल्लीः आज सुप्रीम कोर्ट ने भारत के इतिहास का सबसे बड़े मुद्दे पर अपना फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला दिया. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस बेंच ने सुबह 10 बजे अयोध्या मसले पर फैसला पढ़ना शुरू किया. अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास में सवाल नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए मुस्लिम पक्षकारों को दूसरी जगह पर जमीन देने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि जमीन का बटवारा नहीं किया जा सकता. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के अंदर मंदिर निर्माण की रूप रेखा तैयार करने के लिए कहा है.

-सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में रामलला को दी कानूनी मान्यता

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्षकार अपना पक्ष साबित नहीं कर पाए.

-पांच जजों की बेंच ने कहा कि जमीन का बंटवारा नहीं किया जा सकता.

-कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने के लिए कहा

-मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह पर पांच एकड़ जमीन देने के आदेश दिए गए.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी.

-फैसला सुनाते हुए जजों ने कहा कि हिंदू आस्था के गलत होने का कोई सबूत नहीं

-फैसले में कहा गया कि 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं थी.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले

-ASI की रिपोर्ट में 12 वीं सदीं में मंदिर होने के सबूत

-रिपोर्ट में ईदगाह और मस्जिद का कोई जिक्र नहीं

-राम जन्म भूमि विवाद में फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीता रसोई की भी पूजा भारतीय श्रद्धालु अंग्रेजों के आने से पहले करते थे.

-खुदाई में मिले सबूतों को अनदेखा नहीं किया जा सकता- सुप्रीम कोर्ट

-कोर्ट ने कहा कि अंग्रेजों  के आने से पहले राम चबूतरे की पूजा करते थे हिंदू

-बेंच ने कहा कि विवादित जमीन में कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिल जिससे यह साबित हो कि 18वीं सदी तक नमाज पढ़ी जाती थी.

-कोर्ट ने कहा कि अहाते और चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार साबित हुआ.

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1885 से पहले राम चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार था.