Ayodhya Verdict Live Updates: आज आजाद भारत के बहुचर्चित मुद्दे राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दस बजे अपना फैसला सुनाया. इस फैसले से पहले उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. करीब 40 दिनों तक सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अक्टूबर में अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था. आपको बता दें कि यह दूसरा ऐसा मामला था जो सुप्रीम कोर्ट में इतने दिनों तक चला.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ऐतिहासिक फैसला सुनाएंगे. इन सभी जजों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. आइए आपको संक्षिप्त रूप से इन सभी जजों के बारे में जानकारी देते हैं.

सीजेआई रंजन गोगोई- भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ था. इन्होंने 1978 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया को ज्वाइन किया करियर के शुरुआत में उन्होंने सबसे गवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की थी. 2010 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट आए. और अगले साल वहीं चीफ जस्टिस बना दिए गए. 2012 में रंजन गोगोई को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया. आपको बता दें कि रंजन गोगोई ने ही अभिनेता अमिताभ बच्चन से जुड़े पुनः कर निर्धारण मामले में भी फैसला सुनाया था.

जस्टिस एसए बोबडे- जस्टिस बोबडे नागपुर से संबंध रखते हैं. इन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से बीए करने बाद वहीं से एलएलबी की भी पढ़ाई पूरी की. इन्होंने 1978 में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र को ज्वाइन किया था. 2012 में जस्टिस बोबडे को मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था. इसके बाद इन्हें 2013 में सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया. बता दें कि जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल 2021 में रिटार होंगे.

जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़- जस्टिस डीवाई धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ मूल रूप से मुंबई से संबंध रखते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की और इसके बाद इन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से वकालत की पढ़ाई. इन्हें 2016 में देश के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जज बनने से पहले इन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में जज के रूप में और उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम किया. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटियों में लेक्चर दे चुके हैं. वह सबरीमाला, भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता समेत कई बड़े मामलों में पीठ का हिस्सा रह चुके हैं.

जस्टिस अशोक भूषण- जस्टिस भूषण उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं. इन्होंने साल 1979 में बार काउंसिल को ज्वाइन किया था. इन्होंने भी अपने करियर कि शुरुआत इलाहाबाद हाईकोर्ट से ही शुरू की थी. 2001 में वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किए गए. 2014 में वह केरल हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए और 2015 में चीफ जस्टिस बने. 13 मई 2016 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में कार्यभार संभाला. 2015 में इनकी मौजूदगी वाली केरल हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने आदेश दिया कि पुलिस को FIR की कॉपी लगानी होगी. अगर उसकी मांग RTI में की जाती है तो. इसमें छूट तभी मिलेगी अगर संबंधित अथॉरिटी ये निर्णय ले कि FIR को RTI एक्ट से छूट मिली हुई है.

जस्टिस अब्दुल नजीर- जस्टिस अब्दुल नजीर कर्नाटक के बिलांग करते हैं. अब्दुल नजीर ने 1983 में वकालत की पढ़ाई . जस्टिस नजीर ने 17 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. इन्हीं की बेंच ने ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी घोषित करने का फैसला दिया था. ये उन 9 जजों की बेंच का हिस्सा भी थे जिस बेंच ने कहा था कि निजता का अधिकार यानी Right to privacy नागरिक का एक मौलिक अधिकार है. नजीर ही वह न्यायाधीश थे जिन्होंने अयोध्या मामले में कहा था कि इस मुद्दे पर सुनवाई बड़ी बेंच को करना चाहिए.