नई दिल्लीः मोदी सरकार देश में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति सुधारने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है. योजना के मुताबिक सरकार जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए निजी सेक्टर को भागीदार बनाएगी. ये निजी कंपनियां जिला अस्पताल परिसर में अपना हॉस्पिटल खोलेंगी जिसमें कैंसर, हार्ट अटैल, डायबिटीज जैसी बीमारियों के इलाज किए जाएंगे. यहां होने वाले इलाज के बदले सरकार उनको भुगतान करेगी. Also Read - Atal Pension Yojana 2020 Latest News: पेंशन के नियमों में किया गया बदलाव, साल के किसी भी वक्त बदलवाएं अंशदान

Also Read - PM Kisan Maandhan Yojana: 20 लाख से अधिक किसानों को मिलेंगे 36 हजार रुपए, जल्द करवाएं रजिस्ट्रेशन, पढ़ें योजना की सभी डिटेल्स

दरअसल, देश के करीब 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना के अधीन लाने के बाद से इन गंभीर बीमारियों के इलाज की मांग बढ़ गई है. सरकार की सबसे बड़ी थिंक टैंक नीति आयोग ने इस संबंध में ये सुझाव दिए हैं. इकोनॉमिक टाइम्स अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने बुधवार को इस संबंध में गाइडलाइन्स और मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट का खुलासा किया. इसी में जिला अस्पतालों में निजी कंपनियों को एंट्री देने की बात कही गई है. मौजूदा समय में जिला अस्पताल पूरी तरह से सरकार की ओर से संचालित हैं. Also Read - अहमद पटेल के बचाव में उतरीं प्रियंका गांधी, बोली- पटेल के घर ईडी भेजना सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है

अर्थराइिटस के लिए जिम्मेदार है भारतीय संस्कृति!! जानें क्या हैं बचाव के तरीके

आयोग के दिशानिर्देश के मुताबिक निजी कंपनियों का चुनाव पारदर्शी व प्रतियोगी बोली प्रक्रिया के तहत की जाएगी. इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें चाहें तो इस गाइडलाइन्स में अपने हिसाब से बदलाव कर सकती हैं. नीति आयोग के इस गाइडलाइन्स में सरकार ने पे-पर-यूज (pay-per-use) मॉडल की बात कही गई है. इसके तहत राज्य सरकारें जिला अस्पतालों में निजी कंपनियों को जगह उपलब्ध कराएंगी. वहां निजी कंपनियां अपने हिसाब से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इंस्ट्रूमेंट और डॉक्टर्स की तैनाती करेंगी.

मॉर्डन लाइफस्टाइल की इन आदतों से बढ़ता जा रहा है अंधेपन का खतरा

इसके बाद यहां इलाज कराने वाले मरीज के बदले सरकार इन निजी अस्पतालों को भुगतान करेगी. ये भुगतान पर प्रोसिज्योर या पैकेज के हिसाब से होगा. इसका रेट इन कंपनियों के चुनाव के वक्त प्रतियोगी बोली के आधार पर तय की जाएगी. यानी जो कंपनी किसी खास बीमारी के इलाज के लिए सबसे कम रेट प्रस्तुत करेगी उसे ही उक्त अस्पताल में जगह दी जाएगी. यह समझौता 15 सालों के लिए होगा और इसके बाद इसे रिन्यू कराने और एक कमेटी की सिफारिश के आधार प्रोस्जियोर के रेट बढ़ाए जाएंगे.