नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एबी-एनएचपीएस) का शुभारंभ करने की घोषणा की. यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह से 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म दिवस से शुरू हो जाएगी. इस योजना का मकसद हर गरीब परिवार को हर साल पांच लाख रुपये तक का बीमा उपलब्ध कराना है. इस योजना से 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवार मतलब तकरीबन 50 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे.
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सूत्रों के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि पंजाब, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली का अभी इस योजना में शामिल होना बाकी है जबकि ओडिशा ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है. अभी 22 राज्यों ने ‘ट्रस्ट मॉडल’ के तौर पर इस योजना को लागू करने की बात कही है.

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केंद्र ने इस योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया में, सरकार द्वारा वित्त पोषित सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है. हालांकि अभी केंद्र द्वारा राज्यों को अपना कोष जारी करना बाकी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस योजना के तहत बीमा करने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है.

इन्हें मिलेगा फायदा
इस स्कीम का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आधार पर शामिल 10 करोड़ परिवार को मदद पहुंचाना है. इसमें ये सुनिश्चित करना है कि गरीब-वंचित ग्रुप का कोई भी व्यक्ति इस सुविधा से दूर न रह पाए. इसके लिए परिवार के साइज का निर्धारण नहीं हुआ है. इससे परिवार में जीतने भी सदस्य रहेंगे उन्हें ये सुविधा मिलेगी. इस स्कीम के तहत प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन में एंश्योरेंस कवर होगा.

किस तरह फाइनेंस होगा कवर
बताया जा रहा है कि ये खर्च केंद्र और राज्य सरकार के एक निर्दिष्ट अनुपात में किया जाएगा. सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में स्कीम के लिए फंडिंग 60:40 के अनुपात में होगी. वहीं, पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में केंद्र सरकार के तरफ से 100 फीसदी फंडिंग होगी. इसके साथ ही राज्यों को ये छूट दी जाएगी कि वह अपना भी स्वास्थ्य प्रोग्राम चला सके.

14 राज्यों की केंद्र से बनी बात
14 राज्यों ने केंद्र के साथ एक सहमति बना ली है. इसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, असम, सिक्किम और चंडीगढ़ हैं. ये अपना एक ट्रस्ट मॉडल यूज करेंगे. ट्रस्ट मॉडल बिल के मुताबिक, बिल सीधा सरकार के द्वारा रीइंबर्स होगा. गुजरात और तमिलनाडु ने मिक्स्ड मोड में इसमें सहमति बनाई है.