नई दिल्ली: बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. बीते दिनों कोरोना वायरस की दवाई कोरोनिल (Coronil) लॉन्च करने के बाद से ही लगातार बाबा रामदेव व उनकी कंपनी पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस बीच उत्तराखंड के आयुष मंत्रालय ने कहा कि कंपनियों को जो लाइसेंस जारी की गई थी उसके अनुसार उन्हें केवल इम्यूनिटी बढ़ाने की किट, बुखार की दवा के उत्पादन करने थे, ना कि कोरोना वायरस का इलाज खोजना था.Also Read - MNS chief राज ठाकरे, मां और बहन समेत कोरोना पॉजिटिव निकले, लीलावती अस्‍पताल में भर्ती

इस बाबत आयुष मंत्रालय ने कहा कि उन्हें कोविड 19 के इलाज खोजने से जुड़ी पतंजलि की खबरों की जानकारी समाचार से मिली है. इस तरह के मामलो पर संज्ञान लिया जा रहा है. साथ ही पतंजलि को कोरोनिल से जुड़ी सभी विज्ञापनों को बंद करने को कहा गया है. इस बाबत उत्तराखंड के संयुक्त निदेशक राज्य औषधीय लाइसेंसिग प्राधिकर के डॉ. वाईएस रावत ने ने कहा कि दिव्या फार्मेसी ने कोरोना संबंधि किसी तरह की लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है और न ही उन्हें इस बाबत किसी तरह का लाइसेंस दिया गया था. Also Read - Chhath Puja 2021: दिल्ली में छठ पूजा पर से हट सकती है रोक! कोरोना पर चर्चा के लिए 27 अक्टूबर को बैठक करेगी DDMA

दिव्य फार्मेसी को लाइसेंस केवल इम्युनिटी किट और बुखार के लिए दिया गया था. इस बाबत आयुष मंत्रालय द्वारा दिव्य फार्मेसी को एक नोटिस जारी किया जाएगा. अगर नोटिस का संतोषजनक जवाब कंपनी द्वारा नहीं दिया जाता तो उनके लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा. एक विज्ञप्ति में आयुष मंत्रालय ने कहा कि पतंजलि को उन सभी स्थानों के नाम देने के लिए कहे गए हैं जहां पर कोरोनिल दवाई पर शोध किया गया था. साथ ही शोध से लेकर दवाई बनाने तक की सभी जानकारियों को मंत्रालय को उपलब्द कराने को कहा गया है. Also Read - Coronavirus cases In India: एक दिन में 15,786 लोग हुए संक्रमित, 231 लोगों की हुई मौत