नई दिल्ली: बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. बीते दिनों कोरोना वायरस की दवाई कोरोनिल (Coronil) लॉन्च करने के बाद से ही लगातार बाबा रामदेव व उनकी कंपनी पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस बीच उत्तराखंड के आयुष मंत्रालय ने कहा कि कंपनियों को जो लाइसेंस जारी की गई थी उसके अनुसार उन्हें केवल इम्यूनिटी बढ़ाने की किट, बुखार की दवा के उत्पादन करने थे, ना कि कोरोना वायरस का इलाज खोजना था. Also Read - Coronavirus In India Update: 24 घंटे में 487 लोगों की मौत, हजारों की संख्या में लोग हो रहे संक्रमित, डरावने हैं आंकड़े

इस बाबत आयुष मंत्रालय ने कहा कि उन्हें कोविड 19 के इलाज खोजने से जुड़ी पतंजलि की खबरों की जानकारी समाचार से मिली है. इस तरह के मामलो पर संज्ञान लिया जा रहा है. साथ ही पतंजलि को कोरोनिल से जुड़ी सभी विज्ञापनों को बंद करने को कहा गया है. इस बाबत उत्तराखंड के संयुक्त निदेशक राज्य औषधीय लाइसेंसिग प्राधिकर के डॉ. वाईएस रावत ने ने कहा कि दिव्या फार्मेसी ने कोरोना संबंधि किसी तरह की लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है और न ही उन्हें इस बाबत किसी तरह का लाइसेंस दिया गया था. Also Read - अली फज़ल ने लोगों से की ये अपील, कहा- देश में कोरोना गरीबों ने नहीं अमीरों ने लाया है 

दिव्य फार्मेसी को लाइसेंस केवल इम्युनिटी किट और बुखार के लिए दिया गया था. इस बाबत आयुष मंत्रालय द्वारा दिव्य फार्मेसी को एक नोटिस जारी किया जाएगा. अगर नोटिस का संतोषजनक जवाब कंपनी द्वारा नहीं दिया जाता तो उनके लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा. एक विज्ञप्ति में आयुष मंत्रालय ने कहा कि पतंजलि को उन सभी स्थानों के नाम देने के लिए कहे गए हैं जहां पर कोरोनिल दवाई पर शोध किया गया था. साथ ही शोध से लेकर दवाई बनाने तक की सभी जानकारियों को मंत्रालय को उपलब्द कराने को कहा गया है. Also Read - Operation Samudra Setu: भारतीय नौसेना ने पूरा किया 'ऑपरेशन समुद्र सेतु', 3 देशों से 4000 भारतीयों की हुई वापसी